NEWS PR डेस्क: बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। राज्य सरकार ने फर्जीवाड़ा रोकने, लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद कम करने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए तीन बड़े सुधार लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगी।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से आम लोगों को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से जमीन खरीदने का अधिकार मिलेगा और भू-माफियाओं की मनमानी पर रोक लगेगी।
बदलाव 1: भू-माफियाओं पर सख्ती, पुलिस की भूमिका तय
सरकार ने भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का फैसला किया है। हर अंचल में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दो से चार कुख्यात भू-माफियाओं की पहचान करें, जो फर्जी दस्तावेज या अवैध कब्जे के जरिए लोगों को ठगते हैं।
पहचान होते ही ऐसे लोगों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और कानूनी कार्रवाई शुरू होगी। फर्जी कागजात बनाकर जमीन हड़पने के मामलों में 7 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान लागू किया जाएगा।
पुलिस की भूमिका भी अब स्पष्ट कर दी गई है। बिना अंचल अधिकारी (सीओ) की जानकारी के पुलिस किसी विवादित जमीन पर हस्तक्षेप नहीं करेगी। अगर इस नियम का उल्लंघन होता है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए जाएंगे।
बदलाव 2: रजिस्ट्री से पहले पूरी जानकारी देना अनिवार्य
1 अप्रैल 2026 से रैयती जमीन की रजिस्ट्री से पहले खरीदार को जमीन की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा। ई-निबंधन पोर्टल पर 13 तरह की सूचनाएं भरनी होंगी, जिनमें शामिल हैं:
- निबंधन कार्यालय का नाम
- अंचल, मौजा और थाना
- खाता और खेसरा संख्या
- जमीन का रकबा और चौहद्दी
- जमाबंदी और जमाबंदी धारक का नाम
- खरीदार और विक्रेता का विवरण
- जमीन का प्रकार
अगर आवेदक चाहे तो उसकी दी गई जानकारी संबंधित अंचल अधिकारी के पास सत्यापन के लिए भेजी जाएगी। अधिकारी को 10 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। अगर तय समय में जवाब नहीं आता है, तो जानकारी को सही मानते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इससे खरीदार पहले ही जान सकेगा कि जमीन विवादित है या नहीं, और दस्तावेज वैध हैं या नहीं।
बदलाव 3: सेटेलाइट तस्वीर से होगी जमीन की पहचान
अब जमीन, मकान या फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए सेटेलाइट इमेज अपलोड करना अनिवार्य होगा। जब तक संपत्ति की तस्वीर पोर्टल पर अपलोड नहीं होगी, तब तक रजिस्ट्री के लिए स्लॉट नहीं मिलेगा।
दरभंगा में इस व्यवस्था का सफल ट्रायल किया गया, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में लागू करने का फैसला लिया गया।
नई प्रणाली में जमीन की पहचान अक्षांश और देशांतर (Latitude-Longitude) के आधार पर की जाएगी। इससे जमीन की सटीक लोकेशन दर्ज होगी और एक ही जमीन को बार-बार बेचने जैसी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
यह नियम मकान और फ्लैट की रजिस्ट्री पर भी लागू होगा, जिससे शहरी क्षेत्रों में होने वाले फर्जीवाड़े को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
क्या होगा फायदा ?
सरकार का मानना है कि इन तीन बड़े सुधारों से जमीन से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगेगा, विवाद कम होंगे और रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनेगी।
अब देखना होगा कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली यह नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और आम लोगों को कितनी राहत मिलती है।