NEWS PR डेस्क: बिहार सरकार ने शहरी क्षेत्रों में सड़क निर्माण और मरम्मत को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू कर दी है। अब किसी भी सड़क की ऊंचाई बढ़ाने से पहले पथ निर्माण विभाग की तकनीकी मंजूरी और पूर्ण सर्वेक्षण अनिवार्य होगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई
यह कदम पटना हाईकोर्ट (C.W.J.C. No. 18202/2022) के 31 जनवरी 2025 के आदेश के बाद उठाया गया। कोर्ट ने कहा था कि सड़क निर्माण केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि पूरे बिहार, विशेषकर सेमी-अर्बन क्षेत्रों के नागरिकों को प्रभावित करता है। आदेश में फ्लैंकिंग, उचित ड्रेनेज व्यवस्था और सड़क की ऊंचाई का वैज्ञानिक निर्धारण अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए थे।
नई एसओपी में क्या है विशेष ?
नई व्यवस्था के अनुसार:
सड़क की ऊंचाई बढ़ाने से पहले टोपोग्राफिक और लेवलिंग सर्वे अनिवार्य होगा।
ड्रेनेज सिस्टम, जलनिकासी मार्ग और सड़क किनारे की संरचना का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
निर्माण या मरम्मत में किसी भी तरह का जलभराव या नागरिक असुविधा पैदा न हो, इसे सुनिश्चित करना विभागों की जिम्मेदारी होगी।
सरकार का कहना है कि यह नीति सड़क निर्माण को वैज्ञानिक, पारदर्शी और नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में अहम कदम है। विशेष रूप से शहरी नियोजन और आधारभूत संरचना में सुधार को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। इस मामले में अधिवक्ता राघवेंद्र कुमार ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा था। उनके दायर जनहित याचिका के बाद कोर्ट ने सड़क निर्माण में सुरक्षा और नागरिक हित को प्राथमिकता देने के लिए विस्तृत एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए थे।
इस नई एसओपी के लागू होने से बिहार के शहरी क्षेत्रों में सड़क निर्माण अधिक नियंत्रित, सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से होगा, और वर्षा के दौरान जलजमाव जैसी समस्याओं को रोकने में मदद मिलेगी।