बिहार की राजनीति में हलचल तेज, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की डेट हुई फाइनल

13 अप्रैल को नीतीश कैबिनेट की अहम बैठक हो सकती है, जिसे मौजूदा सरकार की अंतिम बैठक के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अगले ही दिन यानी 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री के इस्तीफे की अटकलें तेज हैं। बताया जा रहा है कि वे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं, जिसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पटना, 09 अप्रैल। बिहार की सियासत इन दिनों तेजी से बदलते घटनाक्रमों के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार (9 अप्रैल) को दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां वे शुक्रवार (10 अप्रैल) को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। इसके बाद उनके शनिवार (11 अप्रैल) को पटना लौटने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, 13 अप्रैल को नीतीश कैबिनेट की अहम बैठक हो सकती है, जिसे मौजूदा सरकार की अंतिम बैठक के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अगले ही दिन यानी 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री के इस्तीफे की अटकलें तेज हैं। बताया जा रहा है कि वे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं, जिसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

इसी कड़ी में 14 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक संभावित है, जिसमें नए नेता का चयन किया जा सकता है। अगर सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार हुआ, तो 15 अप्रैल को पटना के गांधी मैदान में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है।

इस बीच यह भी चर्चा तेज है कि इस बार मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी के खाते में जा सकता है। हालांकि, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर से निशांत कुमार को बड़ी भूमिका देने की मांग उठ रही है। हाल ही में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है, जिसके बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।

दिल्ली में 10 अप्रैल को भाजपा की एक महत्वपूर्ण बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में बिहार के राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।

बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए दिल्ली जा रहे हैं। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पड़ाव बताया।

कुल मिलाकर, आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं, जहां सत्ता परिवर्तन और नए नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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