NEWS PR डेस्क : प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नीतीश सरकार माल ढुलाई खर्च कम करने की दिशा में योजना तैयार कर रही है। इस पहल से राज्य से बाहर और बाहर से आने वाले सामान की परिवहन लागत लगभग आधी रह जाएगी।
बिहार में जल्द ही माल ढुलाई के खर्च में बड़ी राहत मिलने वाली है। नीतीश कुमार सरकार परिवहन का एक ऐसा वैकल्पिक माध्यम विकसित करने जा रही है, जिससे ढुलाई लागत में करीब 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से सरकार इनलैंड वाटरवेज को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है।
सरकार का कहना है कि जल मार्ग से माल परिवहन करने पर खर्च लगभग आधा रह जाएगा, जिससे कारोबारियों और उद्योगों को सीधा लाभ होगा। इसके अलावा सड़क परिवहन की तुलना में टोल टैक्स और ईंधन पर होने वाला व्यय भी काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे कुल लागत में और कमी आएगी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि जल मार्ग से परिवहन करने पर सड़क परिवहन की तुलना में एक बार में लगभग चार गुना अधिक कच्चा माल और भारी कार्गो भेजा जा सकता है। इसे सफल बनाने के लिए राज्य सरकार एक विशेष और समर्पित रोडमैप पर काम कर रही है। इस योजना के तहत बिहार से माल पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। विशेष रूप से रेत, सब्जियां और भारी उद्योगों से संबंधित कार्गो को जल मार्ग से भेजना ज्यादा सुविधाजनक और किफायती साबित होगा, जिससे व्यापार और उद्योग दोनों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
अभी बिहार में दो रो-पैक्स (Ro-Pax) जहाजों का संचालन हो रहा है—एक पटना में और दूसरा भागलपुर में। इसके अलावा राज्य में फिलहाल 21 सामुदायिक जेटियां कार्यरत हैं। सरकार 17 और नई जेटियों के निर्माण की तैयारी में है। इन जेटियों के आसपास हाट-बाजार विकसित किए जाएंगे, जिससे किसानों को अपनी ताजा फल-सब्जियां सीधे बेचने का अवसर मिलेगा। वहीं, बड़े स्तर पर माल परिवहन को सुगम बनाने के लिए नए अंतरराज्यीय टर्मिनलों के विकास की भी योजना बनाई गई है।
बिहार सरकार जलवाहक योजना के तहत केंद्र से मिलने वाली सब्सिडी को अधिक आसान और लाभकारी बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस दिशा में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) पर सब्सिडी के लिए तय न्यूनतम दूरी को 300 किलोमीटर से घटाकर 100 किलोमीटर करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। इस बदलाव से बक्सर, कालुघाट, पटना-हाजीपुर, मोकामा, भागलपुर और साहिबगंज जैसे प्रमुख शहरों के बीच वाटर ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। पहले चरण में बिहार को केंद्र से लगभग एक दर्जन कार्गो जहाज मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन व जलमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच जनवरी के अंत में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने वाली है।