दरभंगा में 1 लाख से अधिक जीविका दीदियां बनीं ‘लखपति दीदी’, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: दरभंगा जिले में जीविका के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक नई मिसाल सामने आई है। जिले में एक लाख से अधिक जीविका दीदियां “लखपति दीदी” बन चुकी हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई कहानी लिख रही हैं। इन महिलाओं की सालाना पारिवारिक आय एक लाख रुपये से अधिक है और उनकी औसत मासिक आय 10 हजार रुपये से ऊपर बनी हुई है।

जीविका के सहयोग से महिलाएं कृषि, पशुपालन, सब्जी उत्पादन, किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई, पापड़-मसाला निर्माण, अगरबत्ती निर्माण, मिथिला पेंटिंग, हस्तकला और अन्य छोटे व्यवसायों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि समाज में उनकी पहचान एक सशक्त और आत्मनिर्भर महिला के रूप में बनी है।

लखपति दीदी पहल से बदल रही गांव की तस्वीर

लखपति दीदी पहल के तहत महिलाओं को कौशल विकास, वित्तीय साक्षरता और विभिन्न आजीविका योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप दरभंगा की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं। दरभंगा जिले में कई जीविका दीदियां अपने हुनर और मेहनत के बल पर आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं।

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बहादुरपुर प्रखंड के गायत्री उत्पादक समूह की पूनम कुमारी मिथिला पेंटिंग के जरिए अपने हुनर को व्यवसाय में बदल चुकी हैं और करीब 20 हजार रुपये मासिक आय अर्जित कर रही हैं।

हनुमाननगर प्रखंड की अंजलि देवी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का ग्राहक सेवा केंद्र संचालित कर रही हैं, जिससे उनकी मासिक आय 20 से 25 हजार रुपये तक हो जाती है और क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग सुविधा भी मिल रही है।

डीएमसीएच अस्पताल में संचालित जीविका दीदी की रसोई में कार्यरत अंजलि कुमारी भी करीब 15 हजार रुपये मासिक आय अर्जित कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। वहीं बेनीपुर की फुल देवी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से लाभ लेकर सिलाई का स्वरोजगार और प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है, जिससे वे 20 हजार रुपये से अधिक मासिक आय कमा रही हैं।

इसी प्रखंड की कृषि उद्यमी रिंकू देवी खाद-बीज के व्यापार के साथ “दीदी की नर्सरी” भी संचालित कर रही हैं। उनकी औसत आय 50 हजार रुपये से अधिक है और वे कई लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। बहेरी प्रखंड की बबीता देवी, जो कभी दो वक्त के भोजन के लिए भी संघर्ष करती थीं, आज सफल उद्यमी बनकर करीब 20 हजार रुपये मासिक आय अर्जित कर रही हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं।

हायाघाट प्रखंड की पूनम कुमारी दीदी अधिकार केंद्र में समन्वयक के रूप में कार्य करते हुए न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को सामाजिक और कानूनी अधिकार दिलाने में भी मदद कर रही हैं।
वहीं केवटी प्रखंड की मीना देवी ने आइसक्रीम का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उनके माध्यम से 20 से अधिक ठेलों के जरिए आइसक्रीम का रिटेल व्यापार हो रहा है और वे लाखों रुपये की मासिक आय अर्जित कर रही हैं।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास

जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) डॉ. ऋचा गार्गी ने बताया कि जीविका के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लखपति दीदी पहल के तहत महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दरभंगा जिले में बड़ी संख्या में जीविका दीदियां अपनी मेहनत और लगन से लखपति दीदी बनकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं। जो महिलाएं अभी इस श्रेणी में नहीं पहुंच पाई हैं, उन्हें भी आसान ऋण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर जल्द ही लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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