पटना HC का आदेश: स्कूल निर्माण में अब नहीं होगा लाल ईंटें का उपयोग, फ्लाई ऐश ईंटें अनिवार्य

पटना हाई कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करते हुए आदेश दिया है कि राज्य के सभी सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में फ्लाई ऐश ईंटों का उपयोग अनिवार्य होगा।

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: बिहार में अब सरकारी स्कूलों और अन्य शैक्षणिक भवनों के निर्माण में लाल ईंटों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पटना हाई कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करते हुए आदेश दिया है कि राज्य के सभी सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में फ्लाई ऐश ईंटों का उपयोग अनिवार्य होगा।

कोर्ट ने पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि जोगपट्टी रोड स्थित चिमानिया बाजार में बन रहे 560 बेड के आवासीय विद्यालय में लाल ईंटों का उपयोग तत्काल प्रभाव से रोका जाए। यह आदेश पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 31 दिसंबर 2021 की अधिसूचना के अनुरूप है, जिसमें थर्मल पावर प्लांट के 300 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी सरकारी निर्माण कार्यों में 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश ईंटों के इस्तेमाल को अनिवार्य किया गया है।

जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने एक ईंट निर्माण कंपनी की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। कोर्ट ने बिहार एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड से यह भी पूछा है कि संबंधित प्रोजेक्ट में फ्लाई ऐश ईंटों के बजाय लाल ईंटों का उपयोग क्यों किया गया। कॉर्पोरेशन की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि आगे सभी निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश ईंटों का ही प्रयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को निर्धारित है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई ऐश ईंटें बिजली घरों से निकलने वाली राख से तैयार की जाती हैं, जिससे औद्योगिक अपशिष्ट का पुनः उपयोग होता है और पारंपरिक लाल ईंटों की भट्ठियों से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है। ये ईंटें मजबूती, टिकाऊपन और तापमान नियंत्रण के लिहाज से भी बेहतर मानी जाती हैं।

हाई कोर्ट के इस आदेश को राज्य में पर्यावरणीय नियमों के सख्त पालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सरकारी स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल और अन्य सार्वजनिक भवनों के निर्माण में लाल ईंटों का उपयोग पूरी तरह बंद होगा, जिससे सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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