पटना को मिलेगी वाटर मेट्रो की सौगात, गंगा किनारे 10 घाटों से होगा संचालन

Puja Srivastav

NEWSPR डेस्क | बिहार की राजधानी पटना के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य को जल्द ही अपनी पहली वाटर मेट्रो मिलने की उम्मीद है, जिसका संचालन गंगा नदी में किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से खासकर दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आवागमन की बड़ी सुविधा मिलने की संभावना है।

प्रस्तावित योजना के तहत गंगा नदी के किनारे कुल 10 घाटों को वाटर मेट्रो स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे कम समय और कम खर्च में यात्रा संभव हो सकेगी, वहीं सड़क यातायात पर निर्भरता भी घटेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पटना वाटर मेट्रो परियोजना के लिए लगभग 769 करोड़ रुपये की लागत से 45 किलोमीटर लंबी डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की गई है। इस परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड द्वारा तैयार कर केंद्र सरकार को सौंप दी गई है। अब अगले चरण में निर्माण कार्य और वित्तीय जिम्मेदारियों को लेकर निर्णय लिया जाना बाकी है।

परियोजना से जुड़ा एक अहम पहलू यह है कि जल परिवहन केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि गंगा नदी के जल प्रबंधन की जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के बाद ही इस योजना को अंतिम मंजूरी मिल सकेगी।

पटना में जिन घाटों को वाटर मेट्रो स्टेशन के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है, उनमें पानापुर, फक्कर महतो घाट, नारियल घाट, दीघा घाट, गांधी घाट, गाय घाट, कोनहारा घाट, काली घाट, कंगन घाट और चेचर घाट शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि पटना वाटर मेट्रो को कोच्चि वाटर मेट्रो की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। कोच्चि में वाटर मेट्रो का किराया तीन रुपये प्रति किलोमीटर है, जहां न्यूनतम किराया 20 रुपये और अधिकतम 40 रुपये निर्धारित है। उम्मीद जताई जा रही है कि पटना में भी इसी तरह का किराया मॉडल लागू किया जा सकता है।

यदि यह परियोजना जमीन पर उतरती है, तो यह न सिर्फ पटना के परिवहन ढांचे को नया आयाम देगी, बल्कि गंगा के जलमार्ग का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित करेगी।

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