मोक्षनगरी गया में इन दिनों पितृपक्ष महासंगम चल रहा है देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए गया पहुंच रहे हैं !
लेकिन पितृपक्ष के बीच गया में एक ऐसी दिवाली मनाई जाती है ! जिसका संबंध रोशनी से ज्यादा पितरों की विदाई और उनके मोक्ष से है।
पितृपक्ष की त्रयोदशी पर गया के घाट सैकड़ों-हजारों दीयों से जगमगा उठते हैं ! इसे पितृ दिवाली कहा जाता है, ! हालांकि प्रशासन ने पटाखे फोड़ने पर रोक लगाई थी ,
मान्यता है कि पितृपक्ष की त्रयोदशी के दिन पितरों को अपने परिजनों से मिलने और फिर अपने लोक लौटने का समय माना जाता है।
गया में पिंडदान करने वाले श्रद्धालु इस दिन अपने पूर्वजों के नाम पर दीप जलाते हैं।
मान्यता है कि इन दीयों की रोशनी पितरों के मोक्ष के मार्ग को प्रकाशित करती है और उन्हें ससम्मान विदाई दी जाती है।
शाम होते ही गया के विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी के देवघाट और आसपास के धार्मिक स्थलों पर दीपों की कतार दिखाई देती है।
पिंडदानी अपने माता-पिता, दादा-दादी और पूर्वजों के नाम पर बड़ी संख्या में दीप जलाते हैं !
फल्गु नदी में दीपदान करते हैं और अपने पितरों की आत्मा की शांति की कामना करते हैं।
पितृ दिवाली सिर्फ दीप जलाने का पर्व नहीं बल्कि ,उन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव है, जिनके लिए लोग हजारों किलोमीटर दूर से गया आते हैं।
दीयों की रोशनी के बीच श्रद्धालु मानो अपने पितरों से यही कहते हैं !
आपने हमें जीवन दिया अब हम आपकी मुक्ति के लिए आए हैं।
गया से आशीष कुमार की रिपोर्ट ;-