NEWS PR डेस्क:। योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार द्वारा राज्य में संचालित विकास योजनाओं और नीतिगत पहलों को लेकर बुधवार को सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के संवाद कक्ष में एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान विभाग के कार्यों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि योजना एवं विकास विभाग राज्य की वार्षिक योजनाओं के सूत्रण, व्यय निर्धारण और अनुश्रवण की अहम जिम्मेदारी निभा रहा है। लोक वित्त समिति के माध्यम से विभिन्न विभागों की परियोजनाओं की स्वीकृति और निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही नीति आयोग के साथ समन्वय, योजना संबंधी आंकड़ों का संग्रहण एवं प्रकाशन भी विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।वित्तीय वर्ष 2024-25 में लोक वित्त समिति के समक्ष कुल 586 योजनाओं की अनुशंसा की गई, जिनकी कुल लागत 1.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 357 योजनाओं की अनुशंसा की गई, जिनकी लागत करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत अक्टूबर 2016 से दिसंबर 2025 तक 8.76 लाख से अधिक युवाओं को भत्ता दिया गया है, जिस पर 1,267 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई। इसके अलावा अक्टूबर 2025 से स्नातक उत्तीर्ण युवाओं को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 31 हजार से अधिक लाभार्थियों को सहायता प्रदान की जा चुकी है।मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत प्रति विधायक और विधान परिषद सदस्य की अनुशंसा राशि को बढ़ाकर 4 करोड़ रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 72 हजार से अधिक योजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, जबकि 17 हजार से अधिक योजनाओं पर काम जारी है।
संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत भी हजारों योजनाएं पूरी की गई हैं। 18वीं लोकसभा के सांसदों की अनुशंसा पर स्वीकृत 2456 योजनाओं में से 1108 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 17वीं लोकसभा के दौरान स्वीकृत अधिकांश योजनाएं भी पूरी कर ली गई हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि राज्य में पंचायत सरकार भवन निर्माण, कब्रिस्तान घेराबंदी, मंदिर चहारदीवारी, ई-किसान भवन और महादलित विकास मिशन के तहत सामुदायिक भवनों का निर्माण तेज़ी से किया जा रहा है। हजारों योजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष पर कार्य प्रगति पर है।
नीति आयोग द्वारा चयनित बिहार के 13 आकांक्षी जिलों को अब तक 275 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि दी गई है। वहीं आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के तहत राज्य के 27 जिलों के 61 प्रखंडों को शामिल किया गया है, जिनके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है।प्रेस वार्ता में बताया गया कि कृषि वर्ष 2024-25 में बिहार ने चावल, मक्का और गेहूं उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। मक्का उत्पादन में बिहार देश में दूसरे स्थान पर रहा। वहीं सकल राज्य घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर वर्तमान मूल्य पर 13.09 प्रतिशत रही है।
बिहार मौसम सेवा केंद्र के माध्यम से राज्य के सभी प्रखंडों और पंचायतों में स्वचालित मौसम केंद्र और वर्षामापक यंत्र स्थापित किए गए हैं। मौसम से जुड़ी चेतावनी और पूर्वानुमान अब मोबाइल ऐप और ऑनलाइन डैशबोर्ड के जरिए आम जनता तक पहुंचाए जा रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि “विकसित बिहार स्ट्रेटेजी रूम” की स्थापना कर नीति निर्माण और निगरानी को अधिक आधुनिक और डेटा आधारित बनाया गया है। कुल मिलाकर, योजना एवं विकास विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि बिहार में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, पारदर्शिता और परिणाम आधारित शासन की दिशा में ठोस और व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं।