NEWS PR डेस्क : बिहार में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। राज्य के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और ओवैसी की पार्टी AIMIM के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल इमान के बीच तीखी बयानबाजी हो रही है। अख्तरुल इमान की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय सिन्हा ने ‘वंदे मातरम्’ को देश की आजादी का महामंत्र बताया और उसके महत्व को रेखांकित किया।
बिहार की राजनीति में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और अख्तरुल इमान के बीच इस मुद्दे पर तीखा विवाद सामने आया है। जहां डिप्टी सीएम ने इसे राष्ट्र गौरव से जोड़ा, वहीं अख्तरुल इमान ने इसे चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति बताया है।
मीडिया से बातचीत में विजय कुमार सिन्हा ने अख्तरुल इमान के बयान का जवाब देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय शौर्य और एकता का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह देश की आजादी का महामंत्र है और जिन्हें राष्ट्र से प्रेम है, उन्हें इससे आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को इसका सम्मान करना चाहिए।
इसके अलावा विजय कुमार सिन्हा ने सरकारी विभागों में खाली पदों के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि सभी रिक्तियों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत भरा जाए, ताकि युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और विभिन्न विभागों का कामकाज प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
वहीं दूसरी तरफ अख्तरुल इमान ने ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े विवाद को उन्मादी राजनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय धर्मनिरपेक्षता सभी को अपने धर्म का पालन करने और दूसरों के विश्वास का सम्मान करने की सीख देती है। उनके अनुसार, संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपनी आस्था, संस्कृति और परंपराओं का पालन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
अख्तरुल इमान ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद के पीछे चुनावी रणनीति काम कर रही है। उनका कहना है कि बंकिम चंद्र चटर्जी की रचना आनंदमठ का संबंध बंगाल से है और वहां चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में जानबूझकर इस मुद्दे को उछाला जा रहा है, ताकि सामाजिक तनाव पैदा कर राजनीतिक लाभ लिया जा सके।