NEWS PR डेस्क : गांधी जयंती के मौके पर दिल्ली का जंतर-मंतर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सियासी टकराव का केंद्र बन गया। SIR यानी Special Intensive Revision के विरोध में प्रदर्शन का ऐलान AISA, RJD सांसद मनोज झा, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग उठाई।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद वहां पहुंचे मनोज झा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जंतर-मंतर पहुंचने के दौरान मनोज झा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या प्रदर्शन के लिए भी अनुमति चाहिए? आखिर यह गांधी का देश है। आज गांधी जयंती है।” उन्होंने कहा कि वह प्रदर्शन में जरूर शामिल होंगे। झा ने CEC ज्ञानेश कुमार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी SIR को लेकर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, ये आरोप प्रदर्शनकारियों के हैं। वहीं चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिया गया बताया है और कहा है कि तीन सदस्यीय आयोग में अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दावा किया कि इससे 13 करोड़ से अधिक लोगों का मतदान अधिकार प्रभावित हुआ। विपक्ष ने 4 जून 2024 की मतदाता सूची बहाल करने और CEC के इस्तीफे की मांग की है।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और तीन सदस्यीय आयोग में अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए हैं। जंतर-मंतर के आसपास भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग की गई है। दिल्ली मेट्रो ने भी 11 स्टेशनों पर प्रवेश-निकास अस्थायी रूप से बंद किया है।