रांची में आदिवासियों ने राजभवन के समक्ष किया धरना प्रदर्शन, सरना धर्म कोड लागू करने की मांग, धर्मकोड नहीं देने पर उलगुलान की चेतावनी

Patna Desk

NEWSPR डेस्क। आदिवासी-सरना धर्म कोड की मांग को लेकर रांची से दिल्ली तक आवाज बुलंद की जा रही है। कुछ संगठन जहां दिल्ली में दो दिनों तक दस्तक दिया और दिल्ली तक इसकी आवाज बुलंद की और दिल्ली में धरना दिया। वहीं आज रांची में विभिन्न आदिवासी संगठन राजभवन के समक्ष धरना दे रहे हैं. केंद्रीय सरना समिति, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद एवं अन्य संगठन शामिल हैं। धरना को संबोधित करते हुए केंद्रीय सरना समिति अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि अगर आदिवासियों का धर्म कोड नहीं मिलता है तो झारखंड सहित पूरे देश में कुल गुलाम किया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक पूजा का आदिवासी अब आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष सतनारायण लकड़ा ने कहा कि यह देश में निवास करने वाले 15 करोड़ आदिवासियों के जीवन मरण का सवाल है। देश में निवास करने वाले 35 लाख की आबादी वाले समुदाय जैन धर्म को अलग से धर्मकोड जनगणना प्रपत्र में है तो फिर देश में निवास करने वाले 12 करोड़ आदिवासियों को अपना अलग धर्म कोड क्यों नहीं मिल सकता है। केंद्र सरकार आदिवासियों के धैर्य की परीक्षा ना लें। महासचिव संजय तिर्की ने कहा कि सरकार आदिवासियों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार छीनना चाहती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, मगर जबरन आदिवासियों को हिंदू और ईसाई बनाया जा रहा है। धरना में ललित कश्यप भुनेश्वर लोहरा संजय तिर्की नीरा टोप्पो कुलदीप सांगा सहित कई उपस्थित है।

 

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