छोटे प्रयास से बड़ी सफलता की मिसाल बनीं रेखा देवी, नाश्ता दुकान से बदली परिवार की तस्वीर

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: दरभंगा, 10 जून। जिले के मनीगाछी प्रखंड अंतर्गत बलौर गांव की निवासी रेखा देवी ने मेहनत, आत्मविश्वास और जीविका योजना के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। कभी आर्थिक तंगी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष करने वाला उनका परिवार आज गांव में एक सफल नाश्ता दुकान के जरिए सम्मानजनक जीवन जी रहा है।

रेखा देवी के पति किशन मंडल मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। अनियमित आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाता था। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घर खर्च को लेकर परिवार हमेशा चिंतित रहता था। सीमित संसाधनों और उचित मार्गदर्शन के अभाव में रेखा देवी चाहकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही थीं।

जीविका से जुड़ने के बाद बदली जिंदगी

गांव में जीविका से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनते देखकर रेखा देवी ने भी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बैठकों में भाग लिया और बचत, वित्तीय प्रबंधन तथा छोटे व्यवसाय संचालन की जानकारी प्राप्त की। जीविका कर्मियों और समूह की अन्य महिलाओं के मार्गदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया।

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50 हजार रुपये की सहायता बनी नई शुरुआत का आधार

जीविका के माध्यम से रेखा देवी को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली। इस राशि से उन्होंने गांव में एक छोटी नाश्ता दुकान शुरू की। दुकान में चाय, समोसा, पकौड़ी, बिस्कुट और अन्य दैनिक उपयोग के नाश्ते की सामग्री रखी गई।

शुरुआती दिनों में ग्राहक कम आते थे, लेकिन रेखा देवी ने धैर्य, मेहनत और गुणवत्ता को अपना आधार बनाया। उन्होंने साफ-सफाई, स्वाद और ग्राहकों के साथ अच्छे व्यवहार को प्राथमिकता दी, जिसका सकारात्मक असर धीरे-धीरे दिखने लगा।

गांव में बनी भरोसेमंद नाश्ता दुकान

आज सुबह और शाम दोनों समय उनकी दुकान पर ग्राहकों की अच्छी भीड़ जुटती है। नियमित ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी आमदनी में भी लगातार वृद्धि हुई है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में उनकी दुकान एक भरोसेमंद नाश्ता केंद्र के रूप में पहचान बना चुकी है।

परिवार की आर्थिक स्थिति में आया बड़ा बदलाव

नाश्ता दुकान से होने वाली नियमित आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। अब बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से हो रही है और घर की आर्थिक चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं। जहां पहले परिवार को हर खर्च के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब परिवार आत्मविश्वास के साथ भविष्य की योजनाएं बना रहा है।

भविष्य में दुकान विस्तार की योजना

रेखा देवी अब अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। उनका लक्ष्य दुकान में अधिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना, ग्राहकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना और आय के नए स्रोत तैयार करना है। वे चाहती हैं कि आने वाले समय में उनकी दुकान गांव की प्रमुख खाद्य सामग्री और नाश्ता दुकान के रूप में स्थापित हो।

अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

रेखा देवी की सफलता की कहानी गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग और मेहनत के दम पर महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

रेखा देवी कहती हैं, “जीविका से जुड़ने के बाद मुझे अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला। 50 हजार रुपये की सहायता से शुरू की गई मेरी नाश्ता दुकान आज परिवार की आय का मजबूत आधार बन चुकी है। अब मेरा सपना है कि मैं अपने व्यवसाय को और बड़ा बनाऊं और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करूं।”

सफलता का संदेश

रेखा देवी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि छोटे प्रयास और मजबूत संकल्प बड़े बदलाव की नींव बन सकते हैं। जीविका जैसी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

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