NEWS PR डेस्क : बिहार विधानसभा के बजट सत्र में एक शब्द को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत की एक टिप्पणी ने सदन से लेकर सड़क तक सियासी माहौल गरमा दिया है। मामला दिवंगत नेता और लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान से जुड़ा है, जिस पर अब दलित सम्मान और राजनीतिक मर्यादा की बहस छिड़ गई है।
बोधगया से आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने 11 फरवरी को बजट सत्र के दौरान अपने भाषण में रामविलास पासवान की राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए पटना में उनकी प्रतिमा लगाने की मांग की। इसी क्रम में उन्होंने पासवान को “बेचारा” कह दिया। इस शब्द पर सत्तापक्ष, खासकर लोजपा (रामविलास) के विधायकों ने कड़ा एतराज जताया और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। “आरजेडी की पहचान, दलितों का अपमान” जैसे नारे लगे और पोस्टर भी लहराए गए।
स्पीकर प्रेम कुमार ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा देर तक चलता रहा।
चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोजपा (रामविलास) ने इस बयान को दलित समाज का अपमान बताया। पटना के करगिल चौक पर पार्टी नेताओं ने प्रदर्शन किया और तेजस्वी यादव का पुतला फूंका। सांसद अरुण भारती, प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी और मंत्री संजय पासवान समेत कई नेता मौजूद रहे।
चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि रामविलास पासवान गरीबों, दलितों और पिछड़ों की आवाज थे, और इस तरह की टिप्पणी करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। पार्टी ने सार्वजनिक माफी की मांग की है।
आरजेडी की सफाई
सोमवार को विधानसभा में फिर इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और लोजपा विधायकों ने कुमार सर्वजीत से माफी की मांग की, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि “बेचारा” कोई अपमानजनक शब्द नहीं है। उनका कहना था कि वे पासवान की प्रतिमा लगाने की मांग कर रहे थे और सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
आरजेडी के अन्य विधायकों ने भी इसे राजनीतिक साजिश बताया और आरोप लगाया कि एनडीए इस मुद्दे को तूल दे रहा है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
रामविलास पासवान लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे और कई बार केंद्रीय मंत्री बने। 2020 में उनके निधन के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई—एक धड़ा चिराग पासवान के नेतृत्व में और दूसरा पशुपति पारस के साथ। वर्तमान में चिराग पासवान की पार्टी एनडीए के साथ सरकार में शामिल है, जबकि आरजेडी विपक्ष में है।
विश्लेषकों का मानना है कि “बेचारा” शब्द का आशय शायद पासवान की संघर्षपूर्ण राजनीति की ओर इशारा करना रहा हो, लेकिन राजनीतिक संदर्भ में यह विवाद का कारण बन गया। 16 फरवरी तक यह मुद्दा शांत नहीं हुआ है। एक शब्द ने बिहार की राजनीति में दलित सम्मान और विरासत की बहस को फिर से जगा दिया है।