NEWS PR डेस्क: पश्चिम चंपारण जिले के योगापट्टी प्रखंड के दियारा इलाके में गंडक नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण बाढ़ और कटाव की समस्या बनी हुई है। इसका सीधा असर अब बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। सिसवा मंगलपुर पंचायत स्थित राजकीय मध्य विद्यालय सिसवनिया में 15 जुलाई से बाढ़ का पानी जमा है। करीब 50 दिनों से स्कूल बंद रहने के कारण सैकड़ों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
कई फीट पानी में डूबा विद्यालय परिसर
विद्यालय परिसर में कई फीट पानी जमा होने के कारण शिक्षक और बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण विद्यालय की स्थिति भी खराब होती जा रही है। स्कूल में रखे फर्नीचर, शैक्षणिक सामग्री और अन्य सरकारी सामान के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
विद्यालय के सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए नाव की जरूरत है, लेकिन नाव उपलब्ध नहीं होने के कारण सामान को बाहर निकालना भी मुश्किल बना हुआ है। ऐसे में एक ओर जहां बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप है, वहीं दूसरी ओर विद्यालय की संपत्ति को भी नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
हर साल बाढ़ से बाधित होती है बच्चों की पढ़ाई
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक जगजीवन राम ने बताया कि स्कूल का अपना पक्का भवन अब तक नहीं बन पाया है। विद्यालय के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद भवन निर्माण की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से किसी तरह विद्यालय का संचालन किया जा रहा था, लेकिन हर साल आने वाली बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती है। इस बार भी बाढ़ का पानी लंबे समय से विद्यालय परिसर में जमा है, जिसके कारण शिक्षण कार्य पूरी तरह बंद है।

शिक्षकों ने अंचलाधिकारी को लिखा पत्र
बाढ़ के कारण स्कूल बंद रहने और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने को लेकर शिक्षकों ने अंचलाधिकारी को पत्र भेजा है। इसमें विद्यालय को तत्काल किसी सुरक्षित स्थान पर अस्थायी रूप से शिफ्ट करने की मांग की गई है, ताकि बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू की जा सके।
शिक्षकों और ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा को लंबे समय तक प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था जल्द की जानी चाहिए। इसके साथ ही विद्यालय के लिए उपलब्ध सरकारी जमीन पर स्थायी भवन निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की जाए।
स्थायी विद्यालय भवन की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ की समस्या को देखते हुए स्कूल के लिए सुरक्षित स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए साथ ही सरकारी जमीन पर जल्द से जल्द पक्का विद्यालय भवन बनाया जाए, ताकि हर साल बाढ़ आने पर बच्चों की पढ़ाई बंद न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि सिसवनिया और आसपास के इलाकों में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने के कारण हर वर्ष इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है।
फिलहाल राजकीय मध्य विद्यालय सिसवनिया करीब 50 दिनों से बंद है और विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी जमा है। सैकड़ों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने के बीच अब ग्रामीणों और शिक्षकों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
पश्चिम चंपारण से रिपोर्टर: मोहम्मद इम्तिआज़