शंभू हॉस्टल मामला, 20 दिन बाद क्यों आया पॉस्को एक्ट

Puja Srivastav

NEWS PR डेस्क : बिहार की राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआती तौर पर जिसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा था, उस पर अब परिजनों और छात्र संगठनों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्रा का शव हॉस्टल के कमरे से बरामद होने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे को सील कर जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं—आत्महत्या, हादसा या किसी अन्य कारण—से जांच की जा रही है। हालांकि, घटनास्थल से मिले कुछ तथ्यों ने मामले को और उलझा दिया है |

परिजनों का आरोप है कि छात्रा पिछले कुछ समय से मानसिक दबाव में थी और हॉस्टल तथा कोचिंग प्रबंधन को इसकी जानकारी थी। उनका कहना है कि अगर समय रहते उसकी स्थिति पर ध्यान दिया गया होता, तो यह घटना टल सकती थी। परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए इसे सिर्फ आत्महत्या मान लेने से इनकार किया है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद छात्र संगठनों और स्थानीय लोगों ने हॉस्टल के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों पर बढ़ते दबाव, हॉस्टल की निगरानी व्यवस्था और काउंसलिंग सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके समाधान पर गंभीरता नहीं दिखाई जाती।

पुलिस अब हॉस्टल वार्डन, सहपाठियों और कोचिंग स्टाफ से पूछताछ कर रही है। साथ ही, मोबाइल कॉल डिटेल, चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसे जांच की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है।

फिलहाल यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पटना समेत पूरे बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की मानसिक सेहत और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। जांच के नतीजे आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और सच्चाई छिपी है।

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