बिहार के पूर्वी चम्पारण ज़िलें के शहर,गांव मे महिलाए और लड़कियाँ भैया दूज को बड़े धूम धाम से मनाती है।यह पर्व दिवाली के बाद भैया दूज का त्योहार मनाया जाता है। रक्षाबंधन की तरह भैया दूज भी बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है। यह त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है। जिसमें साल का पहला भैया दूज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई दूज का पर्व भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है।
इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं और बदले में भाई उन्हें उपहार देते हैं। इस त्योहार को देशभर में भाई फोटा, भाऊ बीज, भाई बिज, भाऊ बीज, भ्रातृ द्वितीय, यम द्वितीया, भतृ दित्य, भाई तिहार और भाई टिक्का के नाम से भी जाना जाता है। हर साल यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।इस दिन महिला लड़की लोग गोधन कुट कर मगल गीत गाकर भाई को सृप्ति है भाई को मुवा देती है उसके बाद अपने ज़िभ मे रेगनी के कटे को चुभाकर जिंदा करती यह और भाई के लिए लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करती है।