सड़कों पर चूल्हा,आंखों में आस भागलपुर में बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया

Jyoti Sinha
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भागलपुर में गंगा की बाढ़ अब सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि दर्द और बेबसी की लहर बन चुकी है। गांव-घर छोड़कर ऊँचाई की ओर पलायन कर चुके लोग अब सड़कों पर अपना जीवन ढोने को मजबूर हैं बाढ़ पीड़ितों का हर दिन एक नई चुनौती है कोई टिन के नीचे बच्चों को सुला रहा है तो कोई सड़क किनारे चूल्हा जलाकर खाना बना रहा है बारिश के बीच भीगी लकड़ियों से रोटियां सेंकती एक महिला की आंखों में सिर्फ एक सवाल है अब आगे क्य वहीं दूसरी ओर पुरुषों को अपने मवेशियों की चिंता खाए जा रही है /

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जिन जानवरों के सहारे घर चलता था उन्हें लेकर वे दर-दर भटक रहे हैं कहीं चारा नहीं, कहीं छांव नहीं बच्चे भी इस त्रासदी के बीच मासूमियत खो बैठे हैं न खेल है, न स्कूल, न किताबें।हालत ये है कि सड़कों पर जिंदगी ठहरी हुई है और प्रशासन अभी तक केवल कागजी भरोसे दे रहा है राहत शिविरों की कोई व्यवस्था नहीं पीने का पानी तक मयस्सर नहीं हर साल गंगा चढ़ती है, घर बह जाते हैं लेकिन अफसरों की नींद नहीं खुलती.

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