NEWS PR डेस्क: पटना, 02 अप्रैल। बिहार सरकार ने जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब इन प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना आवश्यक कागजात के किए गए आवेदन सीधे खारिज कर दिए जाएंगे।
पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर रोक का लक्ष्य
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य फर्जी प्रमाण पत्र बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। लंबे समय से प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी और गलत जानकारी देने की शिकायतें मिल रही थीं, जिन्हें देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
निवास प्रमाण पत्र के लिए सख्त शर्तें
अब सिर्फ पहचान पत्र के आधार पर निवास प्रमाण पत्र नहीं बन सकेगा। आवेदक को अपने पते से जुड़ा वैध दस्तावेज या जमीन से संबंधित कागजात देना अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि व्यक्ति वास्तव में उसी स्थान का निवासी है।
आय प्रमाण पत्र में भी बदलाव
आय प्रमाण पत्र के लिए भी अब केवल पहचान पत्र पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को सैलरी स्लिप, आय प्रमाण या अन्य संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे। इस कदम से गलत जानकारी देकर आय प्रमाण पत्र हासिल करने की कोशिशों पर अंकुश लगेगा।
जाति प्रमाण पत्र के लिए खतियान जरूरी
जाति प्रमाण पत्र बनवाने के नियम भी सख्त किए गए हैं। अब पहचान पत्र के साथ जमीन का खतियान देना जरूरी होगा। यदि जमीन आवेदक के नाम पर नहीं है और परिवार के अन्य सदस्य के नाम पर है, तो वंशावली प्रस्तुत करनी होगी, जिससे पारिवारिक संबंध स्पष्ट हो सके।
कई तरह के दस्तावेज मान्य
सरकार ने खतियान, दान पत्र, जमीन के अन्य कागजात और भूमिहीनों को आवंटित जमीन से जुड़े दस्तावेजों को भी मान्य माना है। इससे अलग-अलग परिस्थितियों में रहने वाले लोगों को आवेदन में सुविधा मिलेगी।
बिना जमीन वालों के लिए भी विकल्प
जिन लोगों के पास जमीन या उससे जुड़े कागजात नहीं हैं, उनके लिए भी व्यवस्था की गई है। ऐसे आवेदक आवेदन के समय स्थल निरीक्षण का विकल्प चुन सकते हैं। इसके बाद राजस्व कर्मी मौके पर जाकर जांच करेंगे और सत्यापन के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।