“ऐसे लोगों को नौकरी का अधिकार नहीं” -दहेज मामलों पर DGP विनय कुमार का बयान

वर्दी रौब के लिए नहीं, सेवा के लिए है” — महिला सुरक्षा पर बिहार पुलिस का सख्त संदेश

Rashmi Tiwari
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बिहार पुलिस में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और घरेलू हिंसा के मामलों को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में राज्य के DGP विनय कुमार ने ‘घरेलू हिंसा और जेंडर आधारित हिंसा’ विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि पुलिस की वर्दी रौब दिखाने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा के लिए है।


कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान DGP विनय कुमार ने कई मामलों का हवाला देते हुए पुलिस व्यवस्था में संवेदनशीलता की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने विशेष रूप से महिला पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कई जगहों पर पीड़ितों के साथ कठोर व्यवहार किया जाता है, जो पूरी तरह गलत है।
“वर्दी सेवा के लिए है, रौब के लिए नहीं”
DGP ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिसकर्मियों को जनता के प्रति संवेदनशील रहना होगा। उन्होंने कहा-“पुलिस की वर्दी रौब दिखाने के लिए नहीं, बल्कि सेवा करने के लिए मिली है।”DGP ने एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि एक महिला SHO पर गरीब परिवार से पैसे और वाहन की मांग करने का आरोप सामने आया है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे पुलिसकर्मियों को वर्दी पहनने का अधिकार नहीं है।उन्होंने दहेज प्रथा और पुलिस कर्मियों के वैवाहिक मामलों में अनियमितताओं पर भी सख्त रुख अपनाया। DGP ने कहा कि दहेज मामलों में शामिल पुलिसकर्मियों और दूसरी शादी कर पहली पत्नी को छोड़ने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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गांव-गांव तक पहुंचने का निर्देश
DGP विनय कुमार ने महिला थाना पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि वे केवल थाने तक सीमित न रहें, बल्कि गांव और पंचायत स्तर तक जाकर लोगों को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जेंडर आधारित हिंसा केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक सोच से जुड़ा विषय है।
पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी
उन्होंने कहा कि कई महिलाएं मानसिक रूप से टूटकर थाने पहुंचती हैं, ऐसे में पुलिस का व्यवहार ही उनके लिए सबसे बड़ी उम्मीद होता है। इसलिए हर पुलिसकर्मी को संवेदनशीलता और सम्मान के साथ व्यवहार करना चाहिए।कार्यशाला में DGP ने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में बिहार के अलग-अलग जिलों में जागरूकता अभियान और सहायता शिविर चलाए जाएंगे, ताकि महिलाओं को सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल मिल सके।

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