22 मामलों के आरोपी तेजस्वी यादव बने RJD के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष, JDU का तीखा हमला

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पटना में रविवार को आयोजित राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेशनल एग्जीक्यूटिव बॉडी की बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस फैसले पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरजेडी पर परिवारवाद और संगठन के भीतर वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाया है।

जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि आरजेडी में दलित, मुस्लिम, ओबीसी और ईबीसी वर्ग से आने वाले कई अनुभवी और योग्य नेता मौजूद हैं, इसके बावजूद सभी को दरकिनार कर तेजस्वी यादव को पार्टी की अहम जिम्मेदारी सौंप दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव पर 22 आपराधिक मामले दर्ज हैं, फिर भी उन्हें पिता की कुर्सी पर बैठा दिया गया। नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा, “ई कोठी का धान ऊ कोठी में डाल दिया गया है।”

जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी में उदय नारायण चौधरी, शिवचंद्र राम, आलोक मेहता, रामचंद्र पूर्वे और अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता मौजूद हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब आरजेडी में अध्यक्ष बनने के लिए संघर्ष नहीं, बल्कि मुकदमों का आरोपी होना जरूरी शर्त बन गई है। उनका आरोप था कि पार्टी में मेहनती कार्यकर्ताओं को कोई स्थान नहीं मिलता, जबकि चापलूसी और धन के दम पर पद हासिल किए जाते हैं।

नीरज कुमार ने यह भी दावा किया कि इस फैसले को लेकर परिवार के भीतर भी असहमति सामने आई है और “घर की बेटी” ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने बैठक के आयोजन स्थल पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि आरजेडी के पास महुआबाग और कौटिल्य नगर में बेहतर और सुविधाजनक आवास मौजूद हैं, जहां बैठक आयोजित की जा सकती थी। इसके बजाय बीमार लालू प्रसाद यादव को होटल की सीढ़ियां चढ़ने के लिए मजबूर किया गया।

नीरज कुमार ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न पहले नहीं मिलने का दोषी लालू यादव हैं। अब एनडीए ने उन्हें सम्मान दिया तो उन्हें पच नहीं रहा है। भाई वीरेंद्र के सवाल उठाने पर नीरज ने कहा कि उन्हें सम्मान नहीं दिया जा रहा है। लालू यादव क्रिमिनल रीतलाल के प्रचार में गए लेकिन बगल में मनेर नहीं गए जहां से भाई वीरेंद्र खड़े थे।

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