बिहार में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए पुलिस ने तेज़ की कार्रवाई, मुजफ्फरपुर बना केंद्र बिंदु

Patna Desk
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बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए राज्य पुलिस अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। विशेष रूप से मुजफ्फरपुर ज़िले में, जहां अवैध शराब कारोबार का जाल तेजी से फैला हुआ है, वहां पुलिस ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की गैरकानूनी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ज़िले में 30 से अधिक सक्रिय शराब माफिया की पहचान कर ली गई है और उनकी संपत्तियों की जब्ती के प्रस्ताव पर कार्य शुरू हो गया है। इन माफियाओं में चुन्नू ठाकुर के नेटवर्क से जुड़े कई पुराने और शातिर तस्करों के नाम भी शामिल हैं। पुलिस अब इन तस्करों के नाम के अलावा उनके परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी गहन जांच कर रही है।चर्चित मिठनपुरा थाना क्षेत्र से लेकर कुढ़नी के रवि सहनी उर्फ ‘मास्टर’ जैसे बड़े तस्करों की संपत्तियां भी अब कानून के घेरे में आ रही हैं। तीन साल पहले मिठनपुरा में गिरफ्तार किए गए अमित कुमार के पास से मिले तीन रजिस्टर, जिनमें शराब आपूर्ति की पूरी जानकारी थी, अब जांच का मुख्य आधार बन चुके हैं। रवि मास्टर के खिलाफ कई थानों में दर्ज मामलों को ध्यान में रखते हुए उसकी संपत्तियों की जांच तेज कर दी गई है।इसके साथ ही, हथियार तस्करी के मामलों में भी पुलिस सक्रिय हो गई है। तुर्की, बरुराज और सदर थाना क्षेत्रों में फैले अवैध हथियार कारोबार से जुड़े लोगों की संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है। हाल ही में बरामद 1600 और 500 कारतूसों के बाद जिन तस्करों की गिरफ्तारी हुई थी, उनकी भी संपत्ति का सत्यापन शुरू हो गया है।

जहरीली शराब से मौतों के मामलों में भी सख्ती

कई क्षेत्रों में जहरीली शराब से हुई मौतों ने प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। कांटी, सरैया, कटरा, मनियारी और काजी मोहम्मदपुर जैसे इलाकों में इन घटनाओं के बाद अब पुलिस ने जहरीली शराब से जुड़े आरोपितों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। संबंधित अंचल अधिकारियों (C.O.) और रजिस्ट्री कार्यालयों से इन व्यक्तियों की संपत्तियों का विवरण मांगा गया है, ताकि कानूनी कार्यवाही को मजबूती दी जा सके।

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सरकार की नई नीति: केवल गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति पर भी शिकंजायह अभियान शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा है। राज्य सरकार का उद्देश्य अब केवल अपराधियों को जेल भेजना नहीं, बल्कि उनके अवैध तरीकों से अर्जित संपत्ति को भी जब्त करना है। यह नीति न केवल शराब और हथियार तस्करी जैसे अपराधों को रोकने में सहायक होगी, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता को भी नई दिशा देगी।

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