आदिवासी समुदाय के विकास के लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार प्रतिबद्ध: अर्जुन मुंडा

Patna Desk

NEWSPR /DESK : आदिवासी समुदाय के विकास और सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार प्रतिबद्ध है। आदिवासियों के सर्वांगीण विकास और वन अधिकार अधिनियम को सही मायनों में लागू करने के लिए आज जनजातीय कार्य मंत्रालय एवं वन,पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का संयुक्त घोषणा पत्र एक ऐतिहासिक कदम है। ये बातें आज दिल्ली के पर्यावरण भवन में आयोजित ‘संयुक्त पत्र हस्ताक्षर समारोह’ में जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहीं। उनके अलावा मौके पर पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर मौजूद रहे। जबकि पर्यावरण राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो और जनजातीय मामलों की राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

दिल्‍ली में संयुक्त पत्र हस्ताक्षर समारोहअर्जुन मुंडा ने कहा कि वनाधिकार को लेकर जनजाति समुदाय औपनिवेशिक काल से संघर्ष करता आया है। आज के इस संयुक्त घोषणा पत्र से देश के विभिन्न हिस्सों के जंगल में रहनेवाले जनजाति भाई-बहनों को व्यक्तिगत या सामुहिक वनाधिकार के माध्यम से उन्हें नैसर्गिक जीवन जीने की सुविधा मिलेगी। आदिवासी कभी भी वनों की अवैध कटाई नहीं करते। खेती -किसानी के लिए लकड़ी की आवश्यकता होने पर वह सबसे पहले वनदेवता की पूजा करते हैं। पर्यावरण के असली संरक्षक वनवासी ही हैं। गत सात वर्षों में 5 लाख से अधिक पट्टे वनवासियों और आदिवासियों को दिये गये हैं। पहले सिर्फ 10 लघु वनोपज को #MSP  मिलता था, वहीं आज मोदी सरकार ने यह संख्या बढ़ा कर 86 कर दी है। ट्रायफेड वन धन केंद्रों के माध्यम से सरकार जनजातीय समुदाय के लोगों की आजीविका में योगदान कर रही है l

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आदिवासीयों ने जंगल की रक्षा कीमौके पर पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आदिवासीयों ने जंगल की रक्षा की है और आज भी कर रहे हैं। इसीलिए सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के अंतर्गत वासियों को मिलने वाले अधिकार उन्हें मिलने चाहिए। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के संरक्षण, संवर्धन, पुनर्निर्माण और जीविका बढ़ाना ये चारों काम करने की जिम्मेदारी केवल अधिकारियों की नहीं बल्कि इसमें वहां की ग्राम सभा की भी भूमिका है। इसीलिए वन क्षेत्र योजना भी ग्राम सभा के दायरे होनी चाहिए।3

Share This Article