भागलपुर: सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल-जल योजना जहां गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा करती है, वहीं भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड अंतर्गत राजंदीपुर पंचायत के वार्ड नंबर 2 में यह योजना पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि करीब 200 घरों के लोग पिछले छह वर्षों से पानी की गंभीर समस्या झेलने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, पानी टंकी बनने के बाद शुरुआती 10 से 15 दिनों तक ही सप्लाई मिली। इसके बाद से आज तक नल सूखे पड़े हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही स्थिति और भयावह हो गई है। लोगों को पीने के पानी के लिए दूसरे के घरों और चापाकलों का सहारा लेना पड़ रहा है।
टूटी पाइपलाइन और बेकार पड़ी टोटियां
स्थानीय लोगों का कहना है कि नल-जल योजना की पाइपलाइन कई जगहों से फट चुकी है। घरों में लगाए गए नल और टोटियां भी टूटकर बेकार हो चुकी हैं। सड़क खुदाई के बाद मरम्मत नहीं होने से सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस समस्या की जानकारी कई बार मुखिया और वार्ड सदस्य को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। लोगों का कहना है कि पानी कनेक्शन के नाम पर उनसे 30 रुपये की राशि भी ली गई थी, लेकिन सुविधा आज तक नहीं मिली।

मजबूरी में गंदा पानी पी रहे लोग
वार्ड के लोगों का कहना है कि अब वे चापाकल के पानी पर निर्भर हैं, लेकिन वहां से निकलने वाला पानी भी दूषित और बदबूदार है। मजबूरी में उसी पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने और स्नान के लिए करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, दूषित पानी के कारण बच्चे और बुजुर्ग कई बार बीमार पड़ चुके हैं। लोगों में संक्रामक बीमारियों का डर लगातार बना हुआ है।
शादी-विवाह और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर
पानी संकट का असर केवल दैनिक जीवन तक सीमित नहीं है। शादी-विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में भी लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई परिवारों को दूसरे मोहल्लों से पानी ढोकर लाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी कभी मौके पर आकर स्थिति की जांच तक नहीं करते।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द जांच कराकर नल-जल योजना को चालू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो गांव में जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। फिलहाल, राजंदीपुर पंचायत के वार्ड नंबर 2 के लोग हर दिन पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकारी योजनाओं के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
भागलपुर से श्यामानंद सिंह की रिपोर्ट