जल-जीवन-हरियाली अभियान से बदली गांवों की तस्वीर, सात साल में 26 हजार से अधिक तालाब-पोखरों का हुआ जीर्णोद्धार

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना। बिहार सरकार के जल-जीवन-हरियाली अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों को नया जीवन देने का काम किया है। वर्ष 2019 से शुरू इस अभियान के तहत राज्यभर में अब तक 26 हजार 383 तालाब और पोखरों का जीर्णोद्धार व निर्माण किया जा चुका है। इससे न सिर्फ पेयजल संकट कम हुआ है, बल्कि किसानों के लिए सिंचाई का स्थायी विकल्प भी तैयार हुआ है।

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गांवों में उपेक्षा और अतिक्रमण की वजह से दम तोड़ रहे तालाब, पोखर, आहर और पइन जैसे जल स्रोतों को अभियान के माध्यम से पुनर्जीवित किया गया है। इन जल स्रोतों में पानी भरने से ग्रामीण इलाकों में भूजल स्तर बढ़ा है, सिंचाई क्षमता में सुधार हुआ है और पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत हुआ है। साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भी ये जलस्रोत जीवनदायी साबित हो रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक वर्ष 2019-20 में 7,137 तालाब-पोखरों का जीर्णोद्धार किया गया। इसके बाद वर्ष 2020-21 में 4,494, वर्ष 2022-23 में 4,419, वर्ष 2023-24 में 3,624, वर्ष 2021-22 में 2,625, वर्ष 2024-25 में 2,474 और वर्ष 2025-26 में 1,612 तालाब-पोखरों का निर्माण या पुनर्जीवन कराया गया।

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अभियान का असर जिलों में भी स्पष्ट दिख रहा है। औरंगाबाद जिले में अब तक 1,675 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। इनमें वर्ष 2019-20 में 1,069, वर्ष 2023-24 में 205, वर्ष 2022-23 में 151, वर्ष 2020-21 में 118, वर्ष 2021-22 में 87 और वर्ष 2024-25 में 45 तालाब-पोखरों का निर्माण या जीर्णोद्धार शामिल है।

औरंगाबाद के पतेया गांव के किसान उदय प्रसाद बताते हैं कि गांव का दशकों पुराना पोखर पहले हमेशा सूखा रहता था। उड़ाही नहीं होने के कारण उसमें पानी टिक नहीं पाता था, जिससे सिंचाई और पेयजल की समस्या बनी रहती थी। हाल के वर्षों में पोखर का जीर्णोद्धार होने के बाद किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने लगा है और पशु-पक्षियों के लिए भी यह बड़ा सहारा बन गया है।

इसी गांव के पंकज कुमार का कहना है कि पोखर के पुनर्जीवन से करीब डेढ़ हजार लोगों को फायदा मिल रहा है। पोखर का सौंदर्यीकरण होने से अब यहां सुबह-शाम लोग टहलने भी आते हैं और आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर में भी सुधार देखा जा रहा है।

ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत जल संचयन संरचनाओं को पुनर्जीवित करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालि

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