पटना में जल्द चलेगी वाटर मेट्रो, पहले चरण में गांधी घाट तक सेवा

Neha Nanhe

NEWS PR डेस्क : पटना में गंगा नदी पर वाटर मेट्रो परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। पहले चरण में करीब 10.5 किमी लंबे रूट पर सेवा शुरू करने की योजना है, जिसके तहत गांधी घाट, कंगन घाट और दीघा घाट पर चार्जिंग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं।

पटना को जल्द ही एक नई और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलने जा रही है। गंगा नदी पर प्रस्तावित वाटर मेट्रो परियोजना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस योजना के तहत नदी किनारे स्थित कई घाटों पर चार्जिंग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं, ताकि वाटर मेट्रो की बोट को आसानी से चार्ज किया जा सके। पर्यटन विभाग के मुताबिक फिलहाल गांधी घाट पर चार्जिंग प्वाइंट बनाने का काम शुरू हो गया है, जबकि कंगन घाट और दीघा घाट पर भी जल्द चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इनकी मदद से वाटर मेट्रो बोट को चार्ज कर पर्यावरण के अनुकूल और सुविधाजनक जल परिवहन सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

परियोजना के पहले चरण में वाटर मेट्रो करीब 10.5 किलोमीटर के मार्ग पर संचालित होगी। इस चरण में गांधी घाट और गायघाट को मुख्य पड़ाव के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके शुरू होने से यात्रियों और पर्यटकों को गंगा किनारे बसे प्रमुख घाटों के बीच तेज, सुरक्षित और आरामदायक जल परिवहन का विकल्प मिलेगा।

दूसरे चरण में इस परियोजना का विस्तार करते हुए इसे हाजीपुर और सोनपुर तक ले जाने की योजना है। इससे पटना के साथ-साथ वैशाली और सारण जिलों के लोगों को भी नदी मार्ग से आवागमन की नई सुविधा मिल सकेगी।

यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस सेवा में दो आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल वाटर मेट्रो बोट चलाई जाएंगी। ये बोट हाइब्रिड तकनीक पर आधारित होंगी, जिनमें बैट्री के साथ बैकअप के तौर पर जेनरेटर भी लगाया जाएगा। इससे बिजली खत्म होने की स्थिति में भी बोट सुरक्षित रूप से चलती रहेगी।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तीन से चार रेस्क्यू बोट भी तैनात की जाएंगी। हर बोट में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और ऑटोमेटिक बोट लोकेशन सिस्टम भी होगा, जिससे कंट्रोल रूम से उनकी स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी।

गर्मी के मौसम में यात्रियों को आरामदायक सफर देने के लिए सभी बोट पूरी तरह एसी से लैस होंगी। इनके डिजाइन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि तेज गति में चलने पर भी नदी में कम लहरें पैदा हों और यात्रा ज्यादा सुरक्षित व स्थिर बनी रहे।

पटना वाटर मेट्रो में इस्तेमाल होने वाली मुख्य बोट का नाम “एमवी-गोमधर कुंवर” रखा गया है। इस अत्याधुनिक बोट की कीमत करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है, जबकि पूरी परियोजना की कुल लागत लगभग 908 करोड़ रुपये आंकी गई है।

यह परियोजना Inland Waterways Authority of India और बिहार सरकार के संयुक्त सहयोग से विकसित की जा रही है। इसके निर्माण और तकनीकी विकास में कोच्चि स्थित जहाज निर्माण विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है, ताकि बोट और घाटों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो सके।

पटना वाटर मेट्रो का पहला रूट दीघा घाट से कंगन घाट के बीच विकसित किया जा रहा है, जिसकी लंबाई लगभग 10.5 किलोमीटर होगी। यह रूट कंगन घाट से शुरू होकर गायघाट, गांधी घाट, दीघा घाट, फरक्का महतो घाट, नारियल घाट, पानापुर, कोंहरा घाट, काली घाट (सोनपुर) और छेछर घाट तक जाएगा।

भविष्य में इस परियोजना का विस्तार करते हुए इसे 10 टर्मिनल और चार अलग-अलग रूट तक विकसित करने की योजना है। इससे पटना के साथ-साथ आसपास के जिलों जैसे वैशाली और छपरा के क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा।

सरकार का मानना है कि वाटर मेट्रो शुरू होने के बाद शहर में सड़क यातायात का दबाव कम होगा और गंगा किनारे पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। साथ ही लोगों को एक अलग तरह का आधुनिक और रोमांचक जल सफर करने का अवसर मिलेगा।

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