बिजली क्षेत्र में बड़ी पहल: पटना में 17 जून को पूर्वी राज्यों का ऊर्जा सम्मेलन

Patna Desk
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🗓️ सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख प्रतिनिधि:📌 इन मुख्य मुद्दों पर होगी चर्चा:ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता (2030 तक):आगामी वर्षों में बिजली की मांग और उत्पादन क्षमता को लेकर राज्य और केंद्र के बीच तालमेल।अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन नेटवर्क:2030 तक की योजनाओं में बड़ी परियोजनाओं का विस्तार और साझा उपयोग।साइबर सुरक्षा रणनीति:बिजली ग्रिड पर संभावित साइबर हमलों से सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा।द्वीपीय विद्युतीकरण योजना:अलग-थलग क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के लिए रणनीतिक योजनाएं।आपातकालीन ट्रांसमिशन बहाली:संकट की स्थिति में बिजली आपूर्ति बहाल करने की तैयारियों पर विचार।डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिरता:वितरण कंपनियों की आर्थिक हालत मजबूत करने के उपाय।⚡ क्यों है यह सम्मेलन महत्वपूर्ण?

पटना | 15 जून 2025:
बिजली क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा बिहार अब एक महत्वपूर्ण आयोजन का गवाह बनने जा रहा है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा 17 जून को पटना में पूर्वी भारत के ऊर्जा मंत्रियों और सचिवों का एक क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अंडमान-निकोबार के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

यह आयोजन न केवल इन राज्यों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से हो रहा है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर भी मंथन किया जाएगा।

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🗓️ सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख प्रतिनिधि:

  • केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे।
  • बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को औपचारिक निमंत्रण भेजा जा चुका है।
  • बिहार के ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह भी इस उच्च स्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे।
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद एक महत्वपूर्ण प्रजेंटेशन देंगे।
  • केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज कुमार अग्रवाल स्वागत भाषण देंगे।

📌 इन मुख्य मुद्दों पर होगी चर्चा:ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता (2030 तक):
आगामी वर्षों में बिजली की मांग और उत्पादन क्षमता को लेकर राज्य और केंद्र के बीच तालमेल।

अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन नेटवर्क:
2030 तक की योजनाओं में बड़ी परियोजनाओं का विस्तार और साझा उपयोग।

साइबर सुरक्षा रणनीति:
बिजली ग्रिड पर संभावित साइबर हमलों से सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा।

द्वीपीय विद्युतीकरण योजना:
अलग-थलग क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के लिए रणनीतिक योजनाएं।

आपातकालीन ट्रांसमिशन बहाली:
संकट की स्थिति में बिजली आपूर्ति बहाल करने की तैयारियों पर विचार।

डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिरता:
वितरण कंपनियों की आर्थिक हालत मजबूत करने के उपाय।


क्यों है यह सम्मेलन महत्वपूर्ण?

इस क्षेत्रीय सम्मेलन के जरिए पूर्वी भारत के राज्य ऊर्जा क्षेत्र की साझा समस्याओं और अवसरों पर एकजुट होकर नीति-निर्माण कर सकेंगे। साथ ही केंद्र सरकार की ओर से 2030 तक ऊर्जा खपत, उत्पादन और ट्रांसमिशन की दीर्घकालिक रणनीति को भी साझा किया जाएगा।


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