नगर निकायों में खत्म होगा ‘वन-मैन शो’, गुप्त मतदान से चुनी जाएगी सशक्त स्थायी समिति

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: बिहार के शहरी निकायों में अब फैसले किसी एक चेहरे की मर्जी से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से लिए जाएंगे। राज्य सरकार ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में सत्ता संतुलन को नया आकार देने का बड़ा फैसला किया है। इसके तहत सशक्त स्थायी समिति के गठन की मौजूदा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव किया जा रहा है।

अब तक यह समिति मेयर या मुख्य पार्षद के नामांकन से बनती थी, जिस पर पक्षपात और मनमानी के आरोप लगते रहे। लेकिन नए संशोधन विधेयक के लागू होते ही यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी। आगे से समिति के सदस्य पार्षदों द्वारा गुप्त मतदान के जरिए चुने जाएंगे। सरकार इसे शहरी शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और सामूहिक नेतृत्व की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।

सरकार के मुताबिक, यह बदलाव नगर निकायों में किसी एक व्यक्ति की अत्यधिक शक्ति पर लगाम लगाएगा। बहुमत के आधार पर चुनी गई समिति में अलग-अलग वार्डों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा, जिससे विकास योजनाओं के चयन और फंड के वितरण में संतुलन बनेगा।

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नई व्यवस्था के तहत चुनाव प्रक्रिया जिला पदाधिकारी के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में कराई जाएगी। नगर विकास एवं आवास विभाग समय-समय पर मतदान से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

गुप्त मतदान की व्यवस्था होने से पार्षद किसी दबाव या राजनीतिक खींचतान के बिना स्वतंत्र रूप से वोट कर सकेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे नगर निकायों के भीतर लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी राजनीति और टकराव में भी कमी आएगी।

सरकार इस संशोधन विधेयक को चालू बजट सत्र में ही विधानमंडल से पारित कराकर कानून का रूप देने की तैयारी में है। इसके बाद बिहार के शहरी निकायों में नई व्यवस्था लागू हो जाएगी, जिससे नगर प्रशासन की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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