NEWS PR डेस्क : बेगूसराय जिले में खेती की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आमदनी सुधारने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा सॉयल फर्टिलिटी मैप तैयार किया जा रहा है। हालिया मिट्टी परीक्षण में नाइट्रोजन, ऑर्गेनिक कार्बन और जिंक जैसे आवश्यक तत्वों की कमी सामने आई है। इसके मद्देनज़र किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनमें खेत की जरूरत के अनुसार उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित इस्तेमाल की सिफारिश की गई है।
बेगूसराय जिले में बहुआही, बलुआही, दोमट और केवाल मिट्टी मुख्य रूप से पाई जाती है। यहां विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं, लेकिन मिट्टी में नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक कार्बन की कमी के कारण फसल उत्पादन पर असर पड़ता है।
किसानों की इस समस्या को दूर करने के लिए कृषि विभाग नियमित रूप से मिट्टी के नमूने जांच रहा है। इसके अलावा, अब विभाग मिट्टी की कमी और उर्वरक जरूरतों को स्पष्ट रूप से दिखाने वाला फर्टिलिटी मैप तैयार कर रहा है। इसके माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि जिले के कौन-से क्षेत्र की मिट्टी में कौन-से पोषक तत्व कम हैं और उनकी पूर्ति के लिए कौन-से उपाय अपनाए जा सकते हैं।
बेगूसराय जिले में मिट्टी के नमूनों की नियमित जांच की जाती है। जिले के कृषि कार्यालय की मिट्टी जांच प्रयोगशाला में इन नमूनों का परीक्षण और विश्लेषण किया जाता है, जिसके तहत मिट्टी में मौजूद 12 प्रमुख पोषक तत्वों का विस्तृत विवरण किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। बेगूसराय जिले में मिट्टी जांच और विश्लेषण से पता चला है कि जिले की मिट्टी में नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक कार्बन की कमी है। इसके अलावा मिट्टी में जिंक की मात्रा भी अपेक्षित स्तर से कम पाई गई है।
जांच के परिणामों के आधार पर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जा रहे हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि उनके खेतों में किस प्रकार के उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्व कितनी मात्रा में इस्तेमाल करने की आवश्यकता है। जिले में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए मिट्टी जांच को और व्यापक किया जा रहा है। इसके तहत छह प्रखंडों में मिनी लैब स्थापित की गई हैं। साथ ही, वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रखंड और पंचायत स्तर पर 12 और मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना की योजना है।
बेहतर फसल उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही फर्टिलिटी मैप तैयार किया जाएगा। इस मैप में प्रखंड वार मिट्टी में पाए जाने वाले 12 प्रमुख पोषक तत्वों की जानकारी शामिल होगी।जिला कृषि पदाधिकारी अभिषेक रंजन और सहायक निदेशक रसायन डॉ. शालिनी ने बताया कि मिट्टी में पोषक तत्वों की जानकारी किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। इससे खेती में लागत घटेगी और आय बढ़ेगी।
चालू वित्तीय वर्ष में विभाग ने जिले भर से 10,000 से अधिक मिट्टी नमूने एकत्रित किए हैं। अब तक लगभग 7,000 नमूनों का विश्लेषण किया जा चुका है, जबकि शेष नमूनों की जांच जारी है। इसके अलावा 6,000 से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार कर किसानों को वितरित भी किए जा चुके हैं।