पैतृक जमीन पर घर बनाने वालों को बड़ी राहत, वंशावली के आधार पर मिलेगा नया बिजली कनेक्शन

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: बिहार में दादा या पिता की जमीन पर घर बनाकर रह रहे लाखों परिवारों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। अब ऐसे लोगों को अपने नाम की जमीन रसीद (LPC) बनवाने के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वंशावली के आधार पर ही नया बिजली कनेक्शन जारी किया जाएगा।

राज्य की बिजली आपूर्ति से जुड़ी एजेंसियों, विशेषकर बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड, ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पैतृक जमीन पर बने घरों के लिए वंशावली दस्तावेज पर्याप्त होंगे। यह निर्णय उन परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो पारिवारिक बंटवारे के अभाव में अब तक बिजली कनेक्शन लेने में असमर्थ थे।

पहले क्या थी समस्या?

अब तक बिजली कनेक्शन के लिए आवेदक के नाम की जमीन रसीद अनिवार्य थी। कई मामलों में जमीन का बंटवारा औपचारिक रूप से दर्ज नहीं होने के कारण परिवारों को आवेदन में कठिनाई होती थी। नतीजतन कुछ लोग अस्थायी या अवैध कनेक्शन के सहारे रह रहे थे।

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नए नियम क्या कहते हैं?

पिता या दादा की जमीन पर बने घर के लिए वंशावली के आधार पर आवेदन स्वीकार होगा।

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में यह व्यवस्था लागू होगी।

आवेदन ऑनलाइन करना अनिवार्य होगा।

फोटो, आधार कार्ड और जमीन से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

एक ही परिसर में दूसरा कनेक्शन: अलग शर्तें

यदि किसी परिसर में पहले से बिजली कनेक्शन है और दूसरा कनेक्शन चाहिए, तो नियम अलग रहेंगे:-

रजिस्टर्ड पारिवारिक बंटवारा पत्र आवश्यक होगा।

किरायेदार के मामले में पंजीकृत किरायानामा अनिवार्य।

अलग चूल्हा और अलग प्रवेश मार्ग होना जरूरी।

यह कदम अगस्त 2025 से लागू 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना के बाद बढ़ते बहु-कनेक्शन मामलों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

तय समय सीमा

शहरी क्षेत्र: 7 दिन में कनेक्शन

ग्रामीण क्षेत्र: 15 दिन में कनेक्शन

पूरी प्रक्रिया की निगरानी राज्य की बिजली वितरण कंपनियां कर रही हैं। शिकायत की स्थिति में संबंधित डिवीजन के विद्युत कार्यपालक अभियंता से संपर्क किया जा सकता है।

पूरे बिहार में लागू

नई व्यवस्था राजधानी पटना सहित सभी जिलों में प्रभावी होगी। सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को राहत देना और साथ ही योजनाओं के दुरुपयोग पर नियंत्रण बनाए रखना है।

यह फैसला खासतौर पर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है, जो वर्षों से कागजी अड़चनों के कारण बिजली कनेक्शन से वंचित थे।

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