NEWS PR डेस्क: बिहार के ग्रामीण इलाकों में आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है। ग्रामीण कार्य विभाग ने गांवों के सर्वांगीण विकास को गति देने के उद्देश्य से 11,312.18 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है।
बुधवार को विधानसभा में भोजनावकाश के बाद बजट पर सरकार का पक्ष रखते हुए ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने सदन को बताया कि विभाग अब सड़क निर्माण में पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता दे रहा है।
उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य के तहत सड़कों के निर्माण में वेस्ट प्लास्टिक और ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। अब तक इस तकनीक से 7,214 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हो चुका है। इसके अलावा, सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए 6.40 लाख पौधे लगाए गए हैं।
सात निश्चय-3 योजना के अंतर्गत ग्रामीण पथों को चरणबद्ध तरीके से 5.5 मीटर चौड़ा करने का निर्णय लिया गया है। इस पहल के जरिए प्रखंड, अनुमंडल और जिला मुख्यालयों को राष्ट्रीय और राज्य उच्च पथों से जोड़ा जाएगा, जिससे आवागमन और व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी।
इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विभाग ने एक विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। पहले चरण में 1,887.86 किलोमीटर लंबी 595 सड़कों का भौतिक सत्यापन किया गया है, जिनका निर्माण वर्ष 2026-27 में प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा।
वहीं, मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) के तहत 3,000 किलोमीटर नए ग्रामीण पथों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 300 किलोमीटर नई सड़कें और 300 पुल बनाए जाएंगे।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए विभाग के नवनियुक्त 480 सहायक अभियंताओं को आईआईटी पटना में विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इसके अलावा, सड़कों के पंचवर्षीय अनुरक्षण में पारदर्शिता लाने के लिए ‘फेसलेस स्वशासी आधुनिक तकनीक’ विकसित की जा रही है, जिसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। ग्रामीण कार्य विभाग की इस व्यापक योजना से आने वाले वर्षों में बिहार के गांवों में बेहतर सड़क नेटवर्क, तेज़ परिवहन और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।