NEWS PR डेस्क: बिहार की राजनीति इन दिनों तेज हलचल के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद राज्य में नई सरकार के गठन और नेतृत्व को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार शाम 5 बजे अपने आवास पर जदयू के सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों की अहम बैठक बुलाई है, जिसमें नई सरकार की रूपरेखा और नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में बिहार में बनने वाली नई सरकार की संरचना, मुख्यमंत्री के नाम और मंत्रिमंडल के स्वरूप पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद कई मुद्दों पर तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद को लेकर बदलाव हो सकता है। बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था में दो की जगह एक ही डिप्टी सीएम रखने पर विचार किया जा रहा है। वहीं कुछ राजनीतिक चर्चाओं में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इधर जदयू के वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार ने भी बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि शाम 5 बजे होने वाली बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायकों और नेताओं की राय भी ली जाएगी और सभी राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। साथ ही नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर पार्टी के भीतर जो नाराजगी की बातें सामने आ रही हैं, उस पर भी चर्चा हो सकती है।
मंत्रिमंडल के संभावित स्वरूप को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार नई सरकार में जदयू कोटे से करीब 15 मंत्रियों को जगह मिल सकती है, जबकि भाजपा की ओर से भी लगभग 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है, जिसमें लोजपा (रामविलास) और हम पार्टी से एक-एक मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर पार्टी नेताओं को विस्तार से जानकारी देंगे और उन्हें भरोसा दिलाएंगे कि संसद में जाने के बावजूद बिहार की राजनीति और सरकार की गतिविधियों पर उनकी नजर बनी रहेगी।
नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में अब सबकी नजर जदयू की इस अहम बैठक पर टिकी हुई है, जहां से बिहार की नई सियासी तस्वीर सामने आ सकती है।