ललन सिंह का आशीर्वाद, निशांत कुमार ने थामी सियासत की कमान;कार्यक्रम से दूर क्यों रहे CM नीतीश?

Asha Rai
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NEWS PR डेस्क: बिहार की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रख दिया। पटना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने JDU की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे और संजय झा ने उन्हें सदस्यता दिलाई।

सदस्यता ग्रहण करने के बाद निशांत कुमार ने पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। हालांकि, इस पूरे आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई।

कार्यक्रम में क्यों नहीं पहुंचे नीतीश?

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सूत्रों के अनुसार, जदयू के कई वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया था कि वे इस कार्यक्रम में शामिल हों। बताया जाता है कि संजय झा समेत कई नेताओं ने उनसे कार्यक्रम में आने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। देर रात तक नेताओं की बातचीत के बाद भी मुख्यमंत्री कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।

परिवारवाद के आरोप से बचने की रणनीति?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कार्यक्रम से नीतीश कुमार की दूरी कोई संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। बिहार की राजनीति में उन्होंने हमेशा खुद को ‘परिवारवाद’ से दूर रखने की छवि बनाई है। ऐसे में यदि वे बेटे के राजनीतिक प्रवेश के दौरान मंच पर मौजूद रहते, तो विपक्ष को उन पर वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाने का मौका मिल सकता था।

पार्टी के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मुख्यमंत्री की यह दूरी पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश भी हो सकती है। जदयू में कई वरिष्ठ नेता लंबे समय से अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यदि नीतीश कुमार खुलकर बेटे के पक्ष में खड़े नजर आते, तो इससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता था।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक,ललन सिंह और संजय झा को आगे रखकर मुख्यमंत्री ने एक तरह का ‘बफर जोन’ तैयार किया है। इससे एक ओर पार्टी में नीतीश कुमार की भूमिका धीरे-धीरे मजबूत हो सकती है, वहीं दूसरी ओर अपनी ‘सुशासन’ और गैर-परिवारवादी छवि को भी बनाए रख सकते हैं।

फिलहाल, निशांत कुमार की JDU में एंट्री बिहार की राजनीति में आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलावों का संकेत मानी जा रही है।

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