NEWS PR डेस्क: भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक सभी नागरिकों को सुरक्षित और किफायती पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 6.1 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य हर व्यक्ति तक सुरक्षित पेयजल की समान और व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना है।
इस दिशा में केंद्र सरकार अगस्त 2019 से राज्यों के सहयोग से जल जीवन मिशन का संचालन कर रही है। मिशन का उद्देश्य देश के सभी ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता का और नियमित रूप से सुरक्षित नल जल उपलब्ध कराना है। हालांकि पेयजल आपूर्ति राज्य का विषय है, इसलिए योजनाओं की योजना बनाना, अनुमोदन, क्रियान्वयन और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होती है, जबकि केंद्र सरकार तकनीकी और वित्तीय सहयोग प्रदान करती है।
सरकार के अनुसार मिशन शुरू होने से पहले देश के केवल 3.23 करोड़ (16.7 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन था। लेकिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों से 3 मार्च 2026 तक 12.58 करोड़ से अधिक नए ग्रामीण परिवारों को नल का पानी कनेक्शन दिया जा चुका है। इसके साथ ही अब देश के लगभग 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 15.82 करोड़ (81.71 प्रतिशत) परिवारों तक नल जल पहुंच चुका है।
सरकार ने मिशन के दायरे और प्रभाव को बढ़ाने के लिए इसे आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाने की घोषणा की थी।
मिशन के तहत जल गुणवत्ता को भी विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित गांवों को जल आपूर्ति योजनाओं में प्राथमिकता दी जाती है। राज्यों को ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षित वैकल्पिक जल स्रोतों पर आधारित पाइप जल योजनाएं तैयार करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित बस्तियों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि प्रत्येक व्यक्ति को पीने और खाना पकाने के लिए प्रतिदिन 8 से 10 लीटर सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जा सके।
सरकार के अनुसार वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों की सभी बस्तियों को अल्पकालिक उपायों के माध्यम से आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रदूषण से मुक्त सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत राज्यों द्वारा उपलब्ध कराए गए नल जल कनेक्शन की राज्य, जिला और गांव स्तर की जानकारी सार्वजनिक डैशबोर्ड पर भी उपलब्ध है।
वहीं शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार अटल कायाकल्प एवं शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT) और अमृत 2.0 के माध्यम से राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता दे रही है। वर्ष 2015 में शुरू किए गए AMRUT मिशन के तहत जल आपूर्ति, सीवरेज, वर्षा जल निकासी, हरित क्षेत्र और गैर-मोटर चालित शहरी परिवहन पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अंतर्गत 43,378.59 करोड़ रुपये की 1,403 जल आपूर्ति परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं।
इसके अलावा वर्ष 2021 में शुरू हुई अमृत 2.0 योजना के तहत अब तक 1,19,670.51 करोड़ रुपये की 3,531 जल आपूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इस योजना का उद्देश्य शहरों को आत्मनिर्भर और जल सुरक्षित बनाना है, साथ ही 500 अमृत शहरों में सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन की सार्वभौमिक व्यवस्था सुनिश्चित करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।