बिहार के 38 जिलों में हरा चारा मानचित्रण अध्ययन की शुरुआत, डेयरी सेक्टर को मिलेगा तकनीकी बल

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: पटना, 06 अप्रैल। बिहार में डेयरी क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत राज्य के सभी 38 जिलों में हरा चारा मानचित्रण अध्ययन शुरू किया गया है। यह पहल राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (कॉम्फेड) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के संयुक्त सहयोग से की जा रही है।

इस संबंध में पटना स्थित होटल चाणक्य में रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस आधारित हरा चारा मानचित्रण पर कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने किया।

वैज्ञानिक तकनीक से मिलेगा फायदा

सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि दुग्ध उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों को अपनाना जरूरी है। वहीं, कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक समीर सौरभ (आईएएस) ने बताया कि इस अध्ययन से पशुपालकों को बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी और दुग्ध उत्पादन की लागत को नियंत्रित किया जा सकेगा।

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प्रशिक्षण में दी गई तकनीकी जानकारी

कार्यशाला में विभिन्न दुग्ध संघों के अधिकारी, नोडल पदाधिकारी और गणनाकर्ता शामिल हुए। उन्हें रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक के माध्यम से चारा मानचित्रण, डेटा संग्रहण और विश्लेषण की विस्तृत जानकारी दी गई। एनडीडीबी, कोलकाता के क्षेत्रीय प्रमुख डॉ. सब्यसाची रॉय ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया।

क्या है इस अध्ययन का उद्देश्य

हरा चारा मानचित्रण का उद्देश्य राज्य में चारा फसलों के क्षेत्रफल और किस्मों का सटीक आकलन करना है। चारा और पशु आहार का दुग्ध उत्पादन लागत में लगभग 70 प्रतिशत योगदान होता है, ऐसे में इसकी उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

यह अध्ययन चारा उत्पादन, बीज उपलब्धता और सिंचाई सुविधाओं के आधार पर समग्र स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण करेगा, जिससे भविष्य की नीतियों और योजनाओं को डेटा आधारित बनाया जा सकेगा।

डेयरी सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

इस पहल से न केवल पशुपालकों को लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य में दुग्ध उत्पादन को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकेगा। बिहार सरकार, एनडीडीबी और कॉम्फेड के संयुक्त प्रयास से यह योजना डेयरी क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।

तकनीक आधारित यह पहल बिहार के डेयरी सेक्टर को नई दिशा देने के साथ-साथ पशुपालकों की आय बढ़ाने और उत्पादन लागत घटाने में सहायक साबित हो सकती है।

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