NEWS PR डेस्क: पटना, 11 अप्रैल। बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने अहम निर्णय लिया है। अब राज्य में सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है, जिस पर राज्य के सचिव Lokesh Kumar Singh के हस्ताक्षर हैं।
यह फैसला ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि निजी प्रैक्टिस के कारण कई बार डॉक्टरों का ध्यान बंटता है, जिससे अस्पतालों में सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
नई व्यवस्था के तहत यह नियम एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से जुड़े बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग, चिकित्सा शिक्षा सेवा संवर्ग और इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान से जुड़े चिकित्सकों पर लागू होगा। यानी मेडिकल कॉलेजों और बड़े सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर भी अब निजी क्लीनिक नहीं चला सकेंगे।
सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इससे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में भरोसा मजबूत होने के साथ-साथ सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
हालांकि, इस बदलाव के आर्थिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने डॉक्टरों के लिए नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) और अन्य प्रोत्साहन देने का प्रावधान भी किया है, ताकि उनकी आय पर असर को संतुलित किया जा सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक अनुशासित और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।