गया में मैथिली ठाकुर का बड़ा बयान: नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष को घेरा

महिलाओं के हक पर राजनीति नहीं चलेगी” — आरक्षण और सम्मान के मुद्दे पर मैथिली ठाकुर की दो टूक

Rashmi Tiwari

महिला सशक्तिकरण और आरक्षण को लेकर अलीनगर की विधायिका मैथिली ठाकुर ने गया के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोरदार तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने नारी सम्मान, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और हालिया विवादित बयानों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत उन्होंने वहां मौजूद महिला कार्यकर्ताओं को प्रणाम करते हुए कहा कि एक महिला होने के नाते वह हर महिला का सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना देश और समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।
प्रेस वार्ता का मुख्य विषय “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” रहा। इस पर बोलते हुए मैथिली ठाकुर ने कहा कि 17 अप्रैल देश के लिए एक ऐतिहासिक दिन बन सकता था, लेकिन विपक्ष ने इसे बाधित कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में पहल हो रही थी, तब विपक्ष ने नकारात्मक राजनीति करते हुए इसका विरोध किया।
उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक पारित होता, तो जनगणना के आधार पर संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिलती। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने इसे नारी विरोधी मानसिकता करार दिया और कहा कि इसका जवाब उन्हें भविष्य में जनता देगी। भावुक अंदाज में उन्होंने कहा, “हम दीया और बाती लेकर तैयार थे, लेकिन उसे जलने नहीं दिया गया,” जिससे महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंची है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पप्पू यादव के हालिया बयान पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति इस तरह की अभद्र टिप्पणी न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण भी है। ऐसे बयान देने वालों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। वहीं, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को लेकर निर्णय व्यक्तिगत होता है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी विकास, रोजगार और समाज के उत्थान पर काम करना होना चाहिए। अंत में उन्होंने दोहराया कि महिलाओं का सम्मान और सशक्तिकरण उनकी प्राथमिकता है, और इसके लिए वे हर स्तर पर आवाज उठाती रहेंगी।
गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट

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