भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाली जीवनरेखा कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से आम लोगों के साथ-साथ शिक्षक समुदाय की परेशानियां भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। पुल बंद होने के कारण रोजाना सैकड़ों शिक्षक जान जोखिम में डालकर नावों के सहारे घंटों का सफर तय कर अपने विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं। कभी कुछ मिनटों में पूरा होने वाला सफर अब कई घंटों की कठिन परीक्षा बन चुका है।

शिक्षकों का कहना है कि उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। समय पर स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें रोज तड़के 3 बजे उठना पड़ता है। घाटों पर सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, जहां नाव पकड़ने की होड़ और अफरा-तफरी का माहौल बना रहता है। नाव पर चढ़ने के दौरान धक्का-मुक्की से हादसे की आशंका हर समय बनी रहती है। कई बार नाव छूट जाने पर शिक्षक विद्यालय देर से पहुंचते हैं, जिसका असर उनकी उपस्थिति और पढ़ाई दोनों पर पड़ रहा है।
ढाई से तीन घंटे तक की लंबी यात्रा
पहले जहां भागलपुर से नवगछिया पहुंचने में कम समय लगता था, वहीं अब शिक्षकों को ढाई से तीन घंटे तक की लंबी यात्रा करनी पड़ रही है। लौटने में भी उतना ही समय खर्च हो जाता है। लगातार थकाऊ सफर और असुविधाओं के कारण शिक्षक शारीरिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि वे बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं, लेकिन रास्ते की मुश्किलें उनके कर्तव्य निर्वहन में बड़ी बाधा बनती जा रही हैं।

शिक्षक समुदाय ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि बेली ब्रिज निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और विक्रमशिला सेतु की मरम्मत जल्द पूरी कराई जाए। शिक्षकों का कहना है कि जब तक पुल दोबारा चालू नहीं होता, तब तक हजारों लोगों की परेशानियां कम नहीं होंगी। भावुक शिक्षकों ने कहा कि वे हर दिन संघर्ष करते हुए अपने दायित्व निभा रहे हैं, लेकिन अब यह स्थिति धीरे-धीरे असहनीय होती जा रही है।
भागलपुर से श्यामानंद सिंह की रिपोर्ट