ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ भागलपुर में बड़ा प्रदर्शन, मेडिकल स्टोर रहे बंद

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में एकजुट हुए दवा कारोबारी, भागलपुर में 1400 दुकानों पर पड़ा असर

Rashmi Tiwari
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भागलपुर में बुधवार को ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री और नई दवा नीति के विरोध में दवा कारोबारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। शहर की करीब 1400 मेडिकल दुकानें और दवा एजेंसियां 24 घंटे की हड़ताल पर हैं, जिससे पूरे जिले में दवा बाजार प्रभावित हो गया। भागलपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के नेतृत्व में दवा कारोबारियों ने एमपी द्विवेदी रोड स्थित देवी बाबू धर्मशाला के पास प्रदर्शन किया और ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद कारोबारियों ने दवा पट्टी इलाके में बाइक रैली निकालकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

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दवा कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री और नई दवा नीति के कारण छोटे मेडिकल स्टोरों का अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि भारी डिस्काउंट और बिना पर्याप्त निगरानी के ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री से न केवल स्थानीय कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ रहा है। कारोबारियों ने अवैध ई-फार्मेसी पर कार्रवाई करने और नई नीति को वापस लेने की मांग की।
कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट
भागलपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष घनश्याम दास कोटिवाला ने बताया कि पूरे बिहार में लगभग 40 हजार और भागलपुर में करीब 1400 दवा दुकानदार इस आंदोलन में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण दवा कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि एआईओसीडी और बीसीडीए पटना के निर्देश पर भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जा सकती है।

इस संबंध में जिला प्रशासन, सिविल सर्जन, औषधि नियंत्रक और औषधि निरीक्षक को ज्ञापन सौंपा गया। घनश्याम दास ने बताया कि भागलपुर जिले के सभी प्रखंडों में मेडिकल दुकानें बंद रखी गईं, हालांकि आवश्यक सेवाएं जारी रहीं। उन्होंने कहा कि कोविड काल में दवा दुकानदारों ने दिन-रात मरीजों की सेवा की थी और कई दवा व्यवसायियों ने अपनी जान तक गंवाई, फिर भी सेवा जारी रखी गई। उनका कहना था कि रात में जरूरत पड़ने पर मोहल्ले की दवा दुकान ही लोगों के काम आती है, ऑनलाइन सेवा नहीं। इसलिए सरकार को मरीजों और छोटे कारोबारियों के हित में ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।
भागलपुर से श्यामानंद सिंह की रिपोर्ट

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