NEWS PR डेस्क: पटना, 22 मई। पटना यूनिवर्सिटी में शनिवार को सीनेट की वार्षिक बैठक के दौरान छात्रों के प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन से जुड़े छात्र यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मुख्य गेट और बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
कुछ देर तक विरोध प्रदर्शन करने के बाद छात्रों ने यूनिवर्सिटी गेट का ताला तोड़ दिया और कैंपस के अंदर प्रवेश कर गए। इसके बाद प्रदर्शनकारी उस सभागार के बाहर धरने पर बैठ गए, जहां जयप्रकाश नारायण सभागार में सीनेट की बैठक चल रही थी।

प्रदर्शन के दौरान छात्र “पुलिसिया दमन बंद करो” और “PU हमारे-आपका, नहीं किसी के बाप का” जैसे नारे लगा रहे थे। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन उनकी मांगों को सुनने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है।

छात्र नेताओं के मुताबिक वे अपनी मांगों को लेकर कुलपति से मिलने पहुंचे थे, लेकिन प्रशासन ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट बंद करवा दिए और पुलिस बुला ली। छात्रों ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि उन्हें अपनी ही यूनिवर्सिटी में प्रवेश करने से रोका गया।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने सीनेट बजट में छात्र हितों और बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त राशि देने की मांग की। छात्रों की प्रमुख मांगों में हॉस्टलों में मेस व्यवस्था शुरू करना, लंबित सत्रों को नियमित करना, परीक्षा के एक महीने के भीतर परिणाम जारी करना और आईटी सेल का निजीकरण समाप्त करना शामिल है।

इसके अलावा छात्रों ने कैंपस में कथित पुलिसिया दमन रोकने, GSCASH और जेंडर सेल को प्रभावी बनाने, सेंट्रल लाइब्रेरी को 24 घंटे खोलने और खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की मांग भी उठाई। कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट में MFA कोर्स दोबारा शुरू करने की मांग भी प्रदर्शन का अहम हिस्सा रही।
छात्रों का आरोप है कि देर रात पुलिस कैंपस और हॉस्टलों में प्रवेश कर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करती है, जिससे भय का माहौल बना हुआ है। फीस वृद्धि वापस लेने की मांग भी प्रदर्शन में प्रमुख रूप से उठाई गई।

वहीं दूसरी ओर सीनेट की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जा रहा है। बैठक में रोजगारपरक और स्किल आधारित नए कोर्स शुरू करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा होनी है। स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर ऑनलाइन माध्यम से पाठ्यक्रम संचालित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। साथ ही पूर्व सैनिकों के लिए मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) में स्नातक कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल है।