गया में बच्चों के अधिकारों पर आधारित पुस्तकों का विमोचन, पॉक्सो कानून पर जागरूकता का संदेश

बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों पर जागरूकता का संदेश, गया में महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन

Rashmi Tiwari

राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के नूतन नगर स्थित कार्यालय में बच्चों के अधिकार, पॉक्सो कानून, बाल शोषण, बाल अपराध और बाल मजदूरी जैसे गंभीर विषयों पर आधारित महत्वपूर्ण पुस्तकों का भव्य विमोचन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने किया।


बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों पर केंद्रित हैं पुस्तकें
विमोचित पुस्तकों में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के बाल सुरक्षा संघर्षों से लेकर बच्चों के अधिकारों से जुड़े विभिन्न कानूनों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।इन पुस्तकों में बच्चों को बेहतर शिक्षा, संस्कार, खेलकूद, स्वस्थ वातावरण और सुरक्षित बचपन देने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी विस्तार से शामिल किया गया है, ताकि नर्सरी स्तर से ही बच्चों के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव रखी जा सके।


“डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने कहा कि आज तकनीक और डिजिटल माध्यमों के दौर में भी पुस्तकों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता।उन्होंने कहा कि पॉक्सो कानून भारत के महत्वपूर्ण कानूनों में शामिल है और इसकी जानकारी समाज, छात्रों, अभिभावकों तथा विधि क्षेत्र से जुड़े लोगों को अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकें समाज में कानूनी जागरूकता फैलाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक प्रभावी माध्यम बनेंगी।
समाज में जागरूकता फैलाने की अपील
डॉ. मिश्रा ने छात्रों और कानून से जुड़े लोगों से अपील की कि वे इन पुस्तकों का अध्ययन करें और समाज में बच्चों की सुरक्षा एवं अधिकारों को लेकर जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक अनारूल हक भी मौजूद रहे। वे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के बिहार-झारखंड राज संयोजक और पूर्व बाल श्रम आयोग सदस्य रह चुके हैं। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ और संगठन से जुड़े कई सदस्य उपस्थित रहे।
गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट

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