NEWS PR डेस्क: भागलपुर। नाथनगर रेफरल अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात की मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मृत नवजात के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को खारिज करते हुए मामले को अलग तरीके से पेश किया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल देखने को मिला।
नर्स ने पेट पर चढकर काफी ताकत लगाकर डिलीवरी कराई…
जानकारी के अनुसार, बिहारीपुर निवासी पूजा कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन सुबह नाथनगर रेफरल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज की जांच तो की गई, लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं कराई गई। इसी दौरान प्रसव पीड़ा बढ़ने पर नर्सों ने ही प्रसव कराया, जबकि उस समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं थी और नर्स ने पेट पर चढकर काफी ताकत लगाकर डिलीवरी कराई।
नवजात की स्थिति की सही तरीके से जांच भी नहीं की गई…
परिजनों का दावा है कि प्रसव के दौरान पर्याप्त चिकित्सकीय निगरानी नहीं थी और बच्ची के जन्म के कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। उनका आरोप है कि नवजात की स्थिति की सही तरीके से जांच भी नहीं की गई। परिजनों ने पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।
मरीज के बारे में समय पर जानकारी नहीं दी गई..
वहीं, इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अन्वेषा ने कहा कि उन्हें मरीज के बारे में समय पर जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि कि वह दो बार लेबर रूम गई थीं और वहां मौजूद नर्स रंजना तथा मधुलिका से मरीजों की स्थिति के बारे में जानकारी ली थी। उनके अनुसार, संबंधित मरीज के बारे में उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। डॉ. अन्वेषा का कहना है कि प्रसव हो जाने के लगभग 40 मिनट बाद उन्हें इस मामले की जानकारी दी गई।
अस्पताल प्रभारी को इसकी जानकारी दी जा सकती थी..
डॉ. अन्वेषा ने कहा कि यदि नर्सों को किसी कारणवश उन्हें सूचना देने में परेशानी थी, तो अस्पताल प्रभारी को इसकी जानकारी दी जा सकती थी, क्योंकि वह भी अस्पताल परिसर में मौजूद थीं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी ड्यूटी सुबह 8 बजे से शुरू हुई थी और रात की ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों एवं नर्सों ने भी उन्हें इस मरीज के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी थी।

दूसरी ओर, अस्पताल प्रभारी डॉ. अनुपमा सहाय का बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना के बाद उन्होंने कहा था कि उस समय वह प्रशासनिक और कार्यालय संबंधी कार्यों में व्यस्त थीं तथा मामले की बेहतर जानकारी ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अन्वेषा ही दे सकती हैं। इसको लेकर अस्पताल प्रबंधन के भीतर समन्वय और सूचना के आदान-प्रदान पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अधिकारियों और परिजनों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास ….
घटना को लेकर अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों और परिजनों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास नजर आ रहा है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी। फिलहाल घटना को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों में नाराजगी है, जबकि स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच की मांग की जा रही है।।भागलपुर से श्यामानंद सिंह की रिपोर्ट