NEWS PR डेस्क: मोतिहारी, 21 जून। पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड की दरमाहा पंचायत में संचालित कबीर अंत्येष्टि योजना में कथित वित्तीय अनियमितता और गबन का मामला सामने आया है। विभागीय जांच में करीब साढ़े चार लाख रुपये की अनियमित निकासी की पुष्टि होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले में पंचायत स्तर पर गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को किसी सदस्य की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। लेकिन जांच में सामने आया कि कई मामलों में योजना की राशि नियमों के विपरीत तरीके से निकाली गई। आरोप है कि कुछ जीवित व्यक्तियों को सरकारी अभिलेखों में मृत दर्शाकर उनके नाम पर भी राशि का भुगतान किया गया।
मामला कल्याणपुर प्रखंड के दरमाहा पंचायत का है, जहां योजना के लाभार्थियों के चयन और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें लंबे समय से उठ रही थीं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दिशा और 20 सूत्री समिति की बैठकों में इस मुद्दे को कई बार उठाया था। बाद में क्षेत्रीय विधायक शालिनी मिश्रा ने जिलाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के निदेशक कुंदन कुमार के नेतृत्व में जांच कराई गई। जांच के दौरान लाभार्थियों के दस्तावेजों, भुगतान अभिलेखों और अन्य रिकॉर्ड का मिलान किया गया, जिसमें कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं।

डीआरडीए निदेशक कुंदन कुमार ने जांच में अनियमित निकासी की पुष्टि करते हुए बताया कि विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले में संलिप्त पाए जाने वाले पंचायत प्रतिनिधियों, तत्कालीन पंचायत सचिव और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि पूर्वी चंपारण जिले में विकास योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। हाल के महीनों में केसरिया और पताही प्रखंडों में विकास कार्यों से जुड़े मामलों ने भी सुर्खियां बटोरी थीं। ऐसे में कबीर अंत्येष्टि योजना से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों का कहना है कि यदि जिले की अन्य पंचायतों में भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की व्यापक जांच कराई जाए, तो और भी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। फिलहाल प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
