NEWS PR डेस्क: पटना, 27 जून। बिहार सरकार राज्य में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए पंचायत स्तर पर बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने राज्य की 2,000 पंचायतों में नियमित रूप से मत्स्य सहायकों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इससे मछली पालकों को तकनीकी मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं की जानकारी और तालाब निर्माण जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी।
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मत्स्य सहायक के पद सृजन का प्रस्ताव वित्त विभाग की प्रशासनिक पदवर्ग समिति को भेज दिया है। समिति से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद भर्ती प्रक्रिया बिहार तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से शुरू होगी।
पहले इन पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब सरकार ने इन्हें नियमित सरकारी पद के रूप में भरने का फैसला किया है। अभ्यर्थियों के लिए फिशरीज (मात्स्यिकी) में स्नातक या समकक्ष डिग्री अनिवार्य होगी। चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।

नियुक्त मत्स्य सहायकों को कृषि विभाग के कृषि समन्वयकों के समान वेतनमान मिलेगा। उन्हें 5,200 से 20,200 रुपये का मूल वेतन, 2,800 रुपये का ग्रेड पे तथा अन्य सरकारी भत्ते नियमानुसार दिए जाएंगे।
राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में बिहार में वार्षिक मछली उत्पादन को बढ़ाकर 25 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में राज्य में लगभग 10.28 लाख टन मछली का उत्पादन होता है, जबकि मांग पूरी करने के लिए आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों से मछली मंगानी पड़ती है।
सरकार का मानना है कि पंचायत स्तर पर मत्स्य सहायकों की नियुक्ति से मछली पालकों को आधुनिक तकनीक, समेकित मत्स्य पालन, तालाब विकास और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।
