NEWS PR डेस्क: पटना, 03 जुलाई। बिहार में राज्य उच्च पथ (स्टेट हाईवे) पर सफर करने वाले वाहन चालकों को जल्द टोल टैक्स देना पड़ सकता है। पथ निर्माण विभाग ने चुनिंदा स्टेट हाईवे और पुलों पर टोल वसूली की तैयारी तेज कर दी है। विभाग का अनुमान है कि इस व्यवस्था से हर वर्ष करीब 700 से 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिसे सड़कों के रखरखाव और मरम्मत पर खर्च किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, जिन राज्य उच्च पथों का निर्माण या उन्नयन एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिले ऋण की मदद से किया गया है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर टोल टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए पथ निर्माण विभाग जल्द अधिसूचना जारी करेगा, जिसमें टोल वाले मार्गों की सूची सार्वजनिक की जाएगी।
टोल वसूली की व्यवस्था के लिए विभाग अलग-अलग क्षेत्रों में एजेंसियों की नियुक्ति करेगा। फिलहाल संबंधित सड़कों पर वाहनों की आवाजाही का डिजिटल सर्वे कराया जा रहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि किस मार्ग पर प्रतिदिन कितने वाहन गुजरते हैं। इसी आधार पर टोल संचालन की जिम्मेदारी एजेंसियों को सौंपी जाएगी।

राज्य सरकार इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल बनाने की तैयारी में है। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) की तकनीकी सहायता ली जाएगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्टेट हाईवे पर टोल भुगतान के लिए कोई नया सिस्टम लागू नहीं किया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्गों की तरह यहां भी वाहन चालक मौजूदा फास्टैग के माध्यम से ही टोल का भुगतान कर सकेंगे। फास्टैग से प्राप्त राशि सीधे पथ निर्माण विभाग के खाते में जमा होगी, जिससे अलग भुगतान व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
विभाग का मानना है कि टोल से होने वाली आय राज्य की सड़कों के बेहतर रखरखाव, समय पर मरम्मत और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हालांकि, किन-किन स्टेट हाईवे और पुलों पर टोल लागू होगा और इसकी दरें क्या होंगी, इसका अंतिम फैसला अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
