NEWS PR डेस्क: पटना, 8 जुलाई। बिहार की प्राचीन ज्ञान परंपरा और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा और ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसायटी (Oxford Sanskrit Text Society) के बीच प्रस्तावित संस्थागत सहयोग (एमओयू) बिहार के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित होगा। इससे हजारों दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपियों के वैज्ञानिक सूचीकरण, डिजिटलीकरण, संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध एवं प्रकाशन का मार्ग प्रशस्त होगा।
मुख्यमंत्री ने राज्यसभा सांसद एवं जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा की इस पहल का स्वागत करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से बिहार की गौरवशाली सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी।
दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण को मिलेगी गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिथिला की समृद्ध ज्ञान परंपरा, संस्कृत साहित्य, प्राचीन पांडुलिपियों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, डिजिटलीकरण, शोध तथा वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ का उद्देश्य देशभर में सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, संरक्षण, डिजिटलीकरण तथा उन्हें वैश्विक शोध समुदाय के लिए सुलभ बनाना है। मिथिला संस्कृत शोध संस्थान और ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसायटी के बीच प्रस्तावित सहयोग इस राष्ट्रीय मिशन को बिहार में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा।
ऑक्सफोर्ड से सहयोग बिहार के लिए गौरव का विषय
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रख्यात संस्कृतविद एवं ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रोफेसर दिवाकर आचार्य द्वारा मिथिला संस्कृत शोध संस्थान के साथ औपचारिक संस्थागत सहयोग का प्रस्ताव भेजा जाना बिहार के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि विश्व के अग्रणी विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ कार्यरत इस प्रतिष्ठित संस्था द्वारा बिहार के इस ऐतिहासिक संस्थान के साथ सहयोग की पहल उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रमाण है।
नीतीश कुमार की घोषणा पर तेजी से चल रहा काम
मुख्यमंत्री ने बताया कि जनवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान मिथिला संस्कृत शोध संस्थान के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण की घोषणा की थी। इसके बाद फरवरी 2025 में राज्य मंत्रिमंडल ने संस्थान के भवन निर्माण, परिसर विकास और पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए लगभग 57 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी, जिस पर वर्तमान में कार्य चल रहा है।
उन्होंने कहा कि आवश्यक प्रशासनिक समर्थन मिलने के बाद यह संस्थागत सहयोग बिहार की इस अमूल्य धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ भारत की ज्ञान-संपदा के संरक्षण और प्रसार को भी नई दिशा देगा।
मिथिला को मिलेगा वैश्विक शोध केंद्र के रूप में स्थान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज्ञान भारतम् मिशन को बिहार में नई गति देगी। साथ ही बिहार को भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि मिथिला संस्कृत शोध संस्थान और ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसायटी के बीच प्रस्तावित सहयोग से बिहार की प्राचीन बौद्धिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर विश्वभर के शोधकर्ताओं तक पहुंच सकेगी।
