NEWS PR डेस्क:सुपौल: आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान और सरकारी सेवाओं को जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से बिहार सरकार की पहल पर मंगलवार को सुपौल नगर परिषद कार्यालय परिसर में सहयोग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याओं को लेकर कुल 11 आवेदन प्राप्त हुए, जिनके समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

हालांकि, शिविर के दौरान कुछ अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल भी उठने लगे। लोगों का कहना है कि सहयोग शिविर का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग विभागों से जुड़ी शिकायतों का एक ही स्थान पर समाधान उपलब्ध कराना है, ऐसे में संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी बेहद जरूरी है।
तीन अधिकारियों की लगी थी ड्यूटी, एक ही रहे मौजूद
जानकारी के अनुसार, सहयोग शिविर में सहायक नगर योजना पर्यवेक्षक राकेश कुमार, यातायात थाना अध्यक्ष उपेंद्र नारायण यादव और बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा की ड्यूटी निर्धारित की गई थी। लेकिन शिविर स्थल पर केवल सहायक नगर योजना पर्यवेक्षक राकेश कुमार ही उपस्थित रहे। वहीं, यातायात थाना अध्यक्ष उपेंद्र नारायण यादव और बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा शिविर में मौजूद नहीं थे।
लोगों ने जताई नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर से बचाकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। लेकिन जब संबंधित विभागों के अधिकारी ही शिविर में उपस्थित नहीं होंगे, तो लोगों को अपनी समस्याएं रखने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे शिविरों में सभी संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकार की इस पहल का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंच सके।
प्रशासन की नजर अनुपस्थित अधिकारियों पर
बिहार सरकार की ओर से लगातार जन शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निपटारे के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिविर से अनुपस्थित रहे अधिकारियों के मामले में जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है। यदि जांच में बिना उचित कारण अनुपस्थिति सामने आती है, तो प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, शिविर में प्राप्त 11 आवेदनों के जल्द निष्पादन का भरोसा संबंधित विभाग की ओर से दिया गया है।सुपौल से अल्ताफ राजा की रिपोर्ट
