बिहार की राजधानी पटना के पालीगंज में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां कोल फील्ड से सेवानिवृत्त 65 वर्षीय कर्मचारी को साइबर अपराधियों ने करीब चार घंटे तक कथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 10 लाख रुपये ठगने की कोशिश की। हालांकि, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के सतर्क कर्मचारियों की सूझबूझ से बुजुर्ग अपनी जीवनभर की मेहनत की कमाई गंवाने से बाल-बाल बच गए।।

सीबीआई और एनआईए अधिकारी बनकर किया फोन
जानकारी के अनुसार, मखमिलपुर निवासी सुरेंद्र भूंइया को साइबर ठगों ने फोन कर खुद को सीबीआई और एनआईए का अधिकारी बताया। ठगों ने दावा किया कि पुलवामा हमले के एक आरोपी ने पूछताछ के दौरान उनका नाम लिया है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए उन्हें कथित तौर पर “डिजिटल अरेस्ट” कर लिया गया।
आरोपियों ने उन्हें धमकी दी कि यदि उन्होंने 10 लाख रुपये नहीं भेजे तो पूरे परिवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा। डर और मानसिक दबाव में आकर बुजुर्ग ठगों के निर्देशों का पालन करने लगे।
बैंक कर्मचारियों की सतर्कता से टली बड़ी ठगी
ठगों के कहने पर सुरेंद्र भूंइया वीडियो कॉल चालू रखते हुए पालीगंज स्थित पंजाब नेशनल बैंक शाखा पहुंचे और आरटीजीएस के माध्यम से 10 लाख रुपये ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसी दौरान बैंक कर्मचारी चंद्रेश नारायण ने उनकी घबराहट और असामान्य व्यवहार को देखकर संदेह जताया। पूछताछ करने पर पूरी घटना सामने आई। इसके बाद शाखा प्रबंधक प्रशांत कुमार ने तत्काल लेन-देन रुकवाया, खाते को सुरक्षित कराया और पुलिस को सूचना दी। बैंक कर्मचारियों की सतर्कता के कारण बुजुर्ग की पूरी राशि सुरक्षित बच गई।
पुलिस ने जारी की अहम सलाह
मामले की सूचना मिलने के बाद पालीगंज थाना पुलिस जांच में जुट गई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी, सीबीआई, एनआईए, पुलिस या अन्य जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती।यदि इस प्रकार की कोई कॉल आए तो घबराएं नहीं, कॉल तुरंत काट दें, संबंधित नंबर को ब्लॉक करें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, निकटतम साइबर थाना या स्थानीय पुलिस से तुरंत संपर्क करें।
