NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली, 28 जुलाई। NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर उठे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने निर्देश दिया कि जिन छात्र प्रदर्शनकारियों की उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही, ऐसे छात्रों के खिलाफ सुनवाई पूरी होने तक किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई नहीं करने को कहा गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि पुलिस की कथित ज्यादती से जुड़े आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं और उनकी निष्पक्ष तथा स्वतंत्र जांच की आवश्यकता प्रतीत होती है। अदालत ने संकेत दिया कि मामले की आगे की सुनवाई के दौरान स्वतंत्र जांच समिति या विशेष जांच दल (SIT) के गठन पर भी विचार किया जा सकता है।
सभी डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी राज्यों को निर्देश दिए, जहां छात्र आंदोलन हुए थे, कि प्रदर्शन से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। इसमें सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस संचार रिकॉर्ड, पीसीआर लॉग और अन्य डिजिटल सामग्री शामिल हैं। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों से संबंधित डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखा जाए, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जाए।
किन छात्रों को मिलेगी राहत?
अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम राहत केवल उन्हीं छात्र प्रदर्शनकारियों को मिलेगी, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जिन लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दर्ज मामलों की जांच जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन पात्र छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।

छह राज्यों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि केवल छात्रों के आरोपों की ही नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी पक्ष ने कानून अपने हाथ में लिया है या अधिकारों का दुरुपयोग किया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश को छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में राहत और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत आगे की जांच व्यवस्था और अन्य पहलुओं पर फैसला ले सकती है।
