कभी देश के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकार रहे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अब राजनीति में अपनी अलग पहचान बना ली है। सोमवार को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ते हुए विधायक बनने का गौरव हासिल किया। वर्षों तक पर्दे के पीछे रहकर बड़े नेताओं की चुनावी रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर अब जनता के जनादेश के साथ विधानसभा पहुंच चुके हैं। ऐसे में उनकी शिक्षा, पेशेवर जीवन और राजनीतिक सफर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

रोहतास जिले के कोनार गांव में जन्मे प्रशांत किशोर ने अपनी स्कूली शिक्षा बिहार में पूरी की। उन्होंने बिहार बोर्ड से 10वीं और पटना साइंस कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई की। इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से बीबीए (BBA) की डिग्री हासिल की।
संयुक्त राष्ट्र तक का सफर
उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने हैदराबाद स्थित एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ASCI) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन (MHA) किया। वर्ष 2010 में फ्रांस के CAVILAM Vichy संस्थान से फ्रेंच भाषा का विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। इसके बाद करीब आठ वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े पब्लिक हेल्थ कार्यक्रमों में काम करते हुए स्वास्थ्य, प्रशासन और नीतिगत कार्यों का अनुभव हासिल किया। बाद में उन्होंने यह नौकरी छोड़कर चुनावी रणनीति के क्षेत्र में कदम रखा और इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) की स्थापना की।
रणनीतिकार से जनप्रतिनिधि तक
चुनावी रणनीतिकार के रूप में प्रशांत किशोर ने नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, एम.के. स्टालिन और वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी समेत कई बड़े नेताओं और राजनीतिक दलों के साथ काम किया। 2 अक्टूबर 2024 को उन्होंने जन सुराज पार्टी की स्थापना की। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में कल मिली जीत ने रणनीतिकार से जनप्रतिनिधि तक के उनके सफर को नई दिशा दी है। अब उनकी नजर आगामी बिहार विधानसभा चुनाव पर होगी, जहां जन सुराज राज्य की कई सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
